Fatehpur Clash : संभल के बाद अब उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में धार्मिक स्थल को लेकर तनाव गहरा गया है। सोमवार सुबह शहर में उस समय तनाव का माहौल बन गया जब बजरंग दल और हिंदू महासभा समेत कई संगठनों के करीब 2000 कार्यकर्ता स्थानीय ईदगाह परिसर में स्थित एक मकबरे पर पहुंचे और उसे मंदिर बताते हुए भगवा झंडा लहराकर पूजा शुरू कर दी।

पुलिस की पहले से तैनाती, फिर भी उग्र हुई भीड़
सूचना के आधार पर पुलिस ने ईदगाह के चारों ओर बैरिकेडिंग की थी। हालांकि, लाठी-डंडों से लैस भीड़ बैरिकेड्स तोड़कर अंदर घुस गई। हिंदू महासभा के नेता मनोज त्रिवेदी स्वयं मकबरे के अंदर पहुंचे और पूजा-पाठ किया। कुछ युवकों ने मकबरे की छत पर चढ़कर भगवा झंडा फहरा दिया।

पथराव और हिंसा की शुरुआत
घटना की सूचना मिलते ही मुस्लिम समुदाय के करीब 1500 लोग ईदगाह पर जुट गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाज़ी के बाद हालात बेकाबू हो गए और पथराव शुरू हो गया। देखते ही देखते ईंट-पत्थरों की बरसात होने लगी और मकबरे में तोड़फोड़ की गई।
भारी पुलिस बल तैनात
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को खदेड़ना शुरू किया। बवाल बढ़ता देख जिले के 10 थानों की फोर्स मौके पर बुलाई गई। वरिष्ठ अधिकारी, एसपी और डीएम, मौके पर मौजूद हैं। पुलिस ने इलाके को घेराबंदी कर संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर दिया है।
सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ
पुलिस कार्रवाई के बाद हिंदू संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता ईदगाह से लगभग 500 मीटर दूर डाक बंगला चौराहे पर जमा हो गए। यहां उन्होंने सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी की। इससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई।
प्रशासन की अपील: शांति बनाए रखें
प्रशासन ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। फतेहपुर के डीएम ने कहा कि “स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की जा रही है। कानून अपने हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।”
सोशल मीडिया पर नज़र
घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। पुलिस ने अफवाहों पर रोक लगाने के लिए इंटरनेट मॉनिटरिंग तेज कर दी है। जिले में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने पर विचार किया जा रहा है। फतेहपुर की यह घटना उत्तर प्रदेश में मंदिर-मस्जिद विवाद के नए अध्याय की तरह सामने आई है। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह धार्मिक भावनाओं के इस टकराव को संभाले और क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखे। वहीं, इस तरह की घटनाओं का बार-बार दोहराव समाज को विभाजित करने की दिशा में बड़ा खतरा बन सकता है।










