Rahul Gandhi affidavit: वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच तनातनी तेज हो गई है। महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगाने वाले राहुल गांधी को अब कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने हलफनामा भेजकर उनके दावों के समर्थन में प्रमाण मांगे हैं। लेकिन राहुल गांधी ने यह हलफनामा भरने और साइन करने से साफ इनकार कर दिया है। राहुल गांधी का तर्क राहुल गांधी ने कहा, “मैं हलफनामा साइन नहीं करूंगा क्योंकि जो डेटा मैंने पेश किया है, वो मेरा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग का है। हमने जो जानकारी सार्वजनिक की है, वो आयोग की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों पर आधारित है। हम जल्द ही यह डेटा सार्वजनिक तौर पर अपलोड करेंगे, जिससे सच्चाई सामने आ जाएगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद सिर्फ असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए खड़ा किया गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अभी डेटा फटेगा, अभी बवाल मचेगा।” “यह अब राजनीतिक नहीं, लोकतंत्र की लड़ाई है” राहुल गांधी ने दावा किया कि 300 सांसद चुनाव आयोग से मिलना चाहते थे और एक अहम दस्तावेज सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें आयोग के दफ्तर तक जाने से रोक दिया गया। उन्होंने कहा, “अगर 300 सांसद आयोग तक पहुंचते, तो उनकी सच्चाई सबके सामने आ जाती। यही डर उन्हें रोक रहा है। अब यह केवल राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ और संविधान की रक्षा की लड़ाई बन गई है।” क्या हैं राहुल गांधी के आरोप? राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान 1 करोड़ नए वोटरों के नाम जोड़े गए, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में असामान्य वृद्धि है। उन्होंने हरियाणा और बिहार में भी मतदाता सूची से SC/ST, OBC और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर हटाने का आरोप लगाया है। चुनाव आयोग की सख्ती राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने उन्हें नोटिस भेजकर उनके दावों के समर्थन में सबूत मांगे हैं। कर्नाटक के CEO द्वारा भेजे गए हलफनामे में राहुल गांधी को रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स 1960 के नियम 20, RP एक्ट 1950 की धारा 31, और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 227 का हवाला देते हुए दस्तावेज़ी प्रमाण के साथ जवाब देने को कहा गया है। अगर राहुल गांधी यह हलफनामा भरते और साइन करते हैं, तो ये धाराएं उनके ऊपर कानूनी जिम्मेदारी भी तय कर सकती हैं। इसके तहत झूठा दावा साबित होने पर कार्रवाई का प्रावधान है। राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच टकराव राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच यह टकराव अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक प्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक ओर राहुल गांधी इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग कानूनी प्रक्रिया और प्रमाणिकता पर ज़ोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है। Read More : Pune accident: कुंडेश्वर मंदिर जा रही पिकअप खाई में गिरी, 6 महिलाओं की मौत, 22 से ज्यादा घायल
















