Shashi Tharoor criticism : “लोकतंत्र को सवालों की वजह से खतरा”: शशि थरूर का चुनाव आयोग पर निशाना

Shashi Tharoor criticism : लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को विपक्षी दलों ने संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च का ऐलान किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग पर ही रोक दिया और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस मार्च में कांग्रेस नेता शशि थरूर भी शामिल रहे, जिन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर तीखा सवाल उठाया। शशि थरूर ने साफ कहा कि जब तक जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह बना रहेगा, तब तक यह चुनाव आयोग की साख को नुकसान पहुंचाता रहेगा। उन्होंने कहा, “जैसे ही इन संदेहों को दूर कर दिया जाएगा, आयोग की साख और विश्वसनीयता वापस आ जाएगी।” थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक बहस नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी संरचना से जुड़ा मामला है। “राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं, तो उनके गंभीर जवाब भी आने चाहिए। यह केवल सरकार की नहीं, चुनाव आयोग की भी जवाबदेही है कि वह सुनिश्चित करे कि चुनावों की निष्पक्षता पर किसी को शक न हो,” उन्होंने कहा। मार्च का उद्देश्य था चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपना, जिसमें हालिया आम चुनावों की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ता पक्ष के पक्ष में झुका हुआ नजर आया, और मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही। शशि थरूर ने आयोग को सलाह दी कि वह सार्वजनिक संवाद के जरिए इन सवालों का जवाब दे और अपने ऊपर लगे संदेह को दूर करे। “चुनाव आयोग का हित इसी में है कि वह खुद को संदेह से ऊपर साबित करे। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि संस्थाएं जनता के प्रति जवाबदेह बनें,” थरूर ने कहा। यह विरोध ऐसे समय में हुआ है जब विपक्ष लगातार ईवीएम, मतगणना प्रक्रिया और चुनावी खर्चों को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस समेत कई दलों का कहना है कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। मार्च के दौरान राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल, शशि थरूर समेत अन्य नेताओं को हिरासत में लिए जाने को विपक्ष ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। शशि थरूर का यह बयान केवल विपक्ष की नाराजगी का हिस्सा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर केंद्रित गंभीर विमर्श की मांग है। लोकतंत्र में यदि सवाल पूछना ही खतरा बन जाए, तो यह पूरे तंत्र के लिए खतरे की घंटी है। Read More  : Assam Rape Case :  असम के डिब्रूगढ़ में 8 साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या, आरोपी गिरफ्तार

Shashi Tharoor criticism : लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को विपक्षी दलों ने संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च का ऐलान किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग पर ही रोक दिया और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस मार्च में कांग्रेस नेता शशि थरूर भी शामिल रहे, जिन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर तीखा सवाल उठाया।

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शशि थरूर ने साफ कहा कि जब तक जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह बना रहेगा, तब तक यह चुनाव आयोग की साख को नुकसान पहुंचाता रहेगा। उन्होंने कहा, “जैसे ही इन संदेहों को दूर कर दिया जाएगा, आयोग की साख और विश्वसनीयता वापस आ जाएगी।”

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थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक बहस नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी संरचना से जुड़ा मामला है। “राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं, तो उनके गंभीर जवाब भी आने चाहिए। यह केवल सरकार की नहीं, चुनाव आयोग की भी जवाबदेही है कि वह सुनिश्चित करे कि चुनावों की निष्पक्षता पर किसी को शक न हो,” उन्होंने कहा।

मार्च का उद्देश्य था चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपना, जिसमें हालिया आम चुनावों की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ता पक्ष के पक्ष में झुका हुआ नजर आया, और मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।

शशि थरूर ने आयोग को सलाह दी कि वह सार्वजनिक संवाद के जरिए इन सवालों का जवाब दे और अपने ऊपर लगे संदेह को दूर करे। “चुनाव आयोग का हित इसी में है कि वह खुद को संदेह से ऊपर साबित करे। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि संस्थाएं जनता के प्रति जवाबदेह बनें,” थरूर ने कहा।

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यह विरोध ऐसे समय में हुआ है जब विपक्ष लगातार ईवीएम, मतगणना प्रक्रिया और चुनावी खर्चों को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस समेत कई दलों का कहना है कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

मार्च के दौरान राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल, शशि थरूर समेत अन्य नेताओं को हिरासत में लिए जाने को विपक्ष ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

शशि थरूर का यह बयान केवल विपक्ष की नाराजगी का हिस्सा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर केंद्रित गंभीर विमर्श की मांग है। लोकतंत्र में यदि सवाल पूछना ही खतरा बन जाए, तो यह पूरे तंत्र के लिए खतरे की घंटी है।

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