Bihar inhuman act : बिहार के बेतिया स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (GMCH) से मानवता को शर्मसार करने वाला वीडियो सामने आया है। वायरल वीडियो में दो लोग एक बुजुर्ग व्यक्ति के शव को सीढ़ियों से घसीटते हुए ले जाते दिखाई दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि शव पर कपड़े तक नहीं थे और अस्पताल परिसर में मौजूद लोग केवल मूकदर्शक बने रहे।

मृतक की पहचान और पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 65 वर्षीय कैलाश प्रसाद के रूप में हुई है, जो एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी थे। परिजनों के मुताबिक, वे शुक्रवार दोपहर से लापता थे। सोमवार को नौतन रोड स्थित श्रीराम नगर के पास एक गड्ढे से उनका शव बरामद किया गया। शव सड़ चुका था, जिससे उसकी पहचान पहले नहीं हो सकी।

पुलिस ने अज्ञात शव मानकर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए GMCH भेजा, जहां से यह वीडियो सामने आया। वीडियो में मास्क पहने दो लोग शव को पैरों से पकड़कर घसीटते नजर आ रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये लोग अस्पताल कर्मचारी थे या पुलिसकर्मी।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
GMCH की अधीक्षक डॉ. सुधा भारती ने कहा, “वीडियो की जांच की जा रही है। शव घसीटने वाले दोनों लोगों की पहचान की जा रही है। दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल में स्ट्रेचर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। GMCH में पोस्टमॉर्टम विभाग पहली मंजिल पर स्थित है, लेकिन शव को वहां तक पहुंचाने के लिए बुनियादी संसाधनों की कमी गंभीर सवाल खड़े करती है।
परिजनों की पीड़ा और लापरवाही का आरोप
मृतक कैलाश प्रसाद के बेटे ने अस्पताल पहुंचकर शव की पहचान की। उन्होंने बताया कि उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उनके लापता होने की सूचना पहले ही पुलिस को दी गई थी। परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते ध्यान दिया गया होता, तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।

सिस्टम पर गंभीर सवाल
इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की लचर व्यवस्था को उजागर किया है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक बुजुर्ग रिटायर्ड कर्मचारी के शव के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार उचित है? क्या अस्पताल में इतना भी इंतजाम नहीं कि शव को सम्मानपूर्वक पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचाया जा सके?
समाज और प्रशासन को सोचने की जरूरत
यह केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि एक सिस्टम की तस्वीर है, जिसमें न मानवीय संवेदना है, न जिम्मेदारी। ऐसे मामलों में सिर्फ जांच या सस्पेंशन काफी नहीं, बल्कि बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और संवेदनशीलता की जरूरत है।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से जांच की बात कही जा रही है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या इस अमानवीयता के जिम्मेदारों को सजा मिलती है या मामला फिर से फाइलों में दबकर रह जाएगा।
Read More : Pregnant Robot China: चीन में विकसित हो रहे ‘प्रेग्नेंट रोबोट’, विज्ञान की छलांग या नैतिक संकट?











