India China Relations : भारत की विदेश नीति में हाल ही में तेज़ी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने अब कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी दिशा बदलनी शुरू कर दी है। इसका ताज़ा संकेत चीन और रूस के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी से मिल रहा है।

चीन-भारत संबंधों में नई शुरुआत?
अगले हफ्ते चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत के दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब गलवान घाटी में 2020 की झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में ठंडक आ गई थी। लेकिन अब यह माना जा रहा है कि भारत और चीन के बीच बातचीत का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन (चीन) में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद रहेंगे। पीएम मोदी आखिरी बार 2018 में चीन में SCO सम्मेलन में शामिल हुए थे। इस लिहाज से यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिका की बढ़ी चिंता
भारत की रूस और चीन से बढ़ती निकटता अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने को कहा था। भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। इसके जवाब में अमेरिका ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से नज़दीक लाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं।
ट्रंप सरकार के इस रुख के बाद भारत ने रूस और चीन के साथ अपने पुराने संबंधों को और मज़बूती देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। माना जा रहा है कि भारत अब बहुपक्षीय कूटनीति के रास्ते अमेरिका पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
डोभाल-पुतिन मुलाकात ने दिए संकेत
अमेरिकी टैरिफ की घोषणा के अगले ही दिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और आगामी शिखर वार्ता की तैयारियों पर चर्चा की। डोभाल ने संकेत दिया कि पुतिन जल्द भारत का दौरा कर सकते हैं।
इसके अलावा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर 21 अगस्त को रूस दौरे पर जाएंगे, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि भारत एक बार फिर रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को सशक्त बना रहा है।
भारत की विदेश नीति फिलहाल एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और आर्थिक दबाव के बीच भारत ने रूस और चीन जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को फिर से प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है। आने वाले हफ्तों में दिल्ली से कोई बड़ा कूटनीतिक निर्णय सामने आ सकता है, जो एशियाई भू-राजनीति की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाएगा।










