Hindu temple attack USA : इंडियाना, अमेरिका: अमेरिका में खालिस्तानी समर्थकों की भारत विरोधी गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालिया घटना में इंडियाना राज्य के ग्रीनवुड शहर में स्थित बापी स्वामी नारायण मंदिर पर हमला किया गया है। बताया जा रहा है कि यह मंदिर पिछले एक साल में चौथी बार खालिस्तानी तत्वों का निशाना बना है।

मंदिर की दीवारों पर लिखे गए भारत विरोधी नारे
इस बार न केवल मंदिर में तोड़फोड़ की गई, बल्कि दीवारों पर भारत विरोधी नारे भी लिखे गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर Hindu American Foundation ने इस घटना का वीडियो साझा किया और बताया कि समुदाय के धार्मिक स्थलों पर बार-बार ऐसे हमले चिंता का विषय हैं।

भारतीय दूतावास की तीखी प्रतिक्रिया
शिकागो स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “इंडियाना के ग्रीनवुड में बापी स्वामी नारायण मंदिर पर हमला बेहद निंदनीय है। हम स्थानीय पुलिस और प्रशासन के संपर्क में हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।”
बढ़ती खालिस्तानी गतिविधियां: एक वैश्विक खतरा
यह पहली बार नहीं है जब खालिस्तानी तत्वों ने हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न और सिडनी, ब्रिटेन के लंदन, और कनाडा में भी इस तरह की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। खासतौर पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से खालिस्तानी समर्थकों द्वारा खुलेआम भारत विरोधी प्रचार और हमलों में तेजी आई है।
खालिस्तान आंदोलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि खालिस्तान आंदोलन की जड़ें 1947 के विभाजन के समय से जुड़ी हैं। 1980 के दशक में जनरल भिंडरावाले के नेतृत्व में यह आंदोलन चरम पर पहुंचा। भारत सरकार ने 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, जिसमें भिंडरावाले मारे गए। इस कार्रवाई के बाद से कट्टरपंथी सिखों का एक वर्ग भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा है।
भारत की वैश्विक अपील
भारत सरकार ने कई बार अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से अपील की है कि वे अपने यहाँ मौजूद चरमपंथी समूहों पर सख्त कार्रवाई करें। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों पर हमले, धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हो रहे बार-बार के हमले वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन चुके हैं। यह केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता और सांस्कृतिक विरासत पर सीधा प्रहार है। अब वक्त आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन उग्रवादी तत्वों के खिलाफ एकजुट होकर ठोस कदम उठाए।
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