Naxalites killed : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी उन्मूलन की दिशा में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो शीर्ष माओवादी नेता मारे गए। इन पर कुल मिलाकर 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह कार्रवाई राज्य के नक्सल प्रभावित करेगुट्टा पहाड़ी इलाके में की गई, जो छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित है और लंबे समय से माओवादियों का गढ़ बना हुआ है।

मारे गए माओवादी नेताओं की पहचान
मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों की पहचान विजय रेड्डी और लोकेश सलामे के रूप में हुई है। विजय रेड्डी पर 25 लाख और लोकेश सलामे पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। दोनों माओवादी लंबे समय से सुरक्षाबलों के रडार पर थे और कई बड़े हमलों में शामिल रहे थे। घटनास्थल से एके-47 राइफल सहित भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और माओवादी साहित्य भी बरामद हुआ है।

कैसे हुआ ऑपरेशन?
बुधवार सुबह खुफिया जानकारी मिलने के बाद बस्तर के जंगलों में सुरक्षा बलों ने एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान जब माओवादियों ने खुद को घिरा पाया, तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों माओवादी ढेर हो गए। मुठभेड़ के बाद इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया गया, ताकि कोई अन्य माओवादी भागने न पाए।
केंद्र सरकार का माओवाद मुक्त भारत का संकल्प
गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही 2026 तक देश को माओवाद से मुक्त करने का संकल्प व्यक्त किया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़, झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर माओवाद विरोधी अभियान चल रहे हैं। करेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र को माओवादी गतिविधियों का प्रमुख अड्डा माना जाता है, और वहां 21 अप्रैल 2025 से विशेष ऑपरेशन जारी है, जिसमें अब तक कई माओवादी ढेर किए जा चुके हैं।
सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी
लगातार चल रहे अभियानों में यह मुठभेड़ बेहद अहम मानी जा रही है। सुरक्षा बलों का कहना है कि इस ऑपरेशन से माओवादियों के नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है और उनके मनोबल पर भी असर पड़ेगा। करीब 3,000 अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ सरकार माओवाद की कमर तोड़ने में जुटी है।
छत्तीसगढ़ में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। विजय रेड्डी और लोकेश सलामे जैसे बड़े नामों का खात्मा इस बात का संकेत है कि सरकार माओवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रही है। गृह मंत्रालय के 2026 तक माओवाद मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में यह मुठभेड़ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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