Army Rocket Force : भारत द्वारा किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तेज़ कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अब खुलकर जवाबी तैयारी में जुट गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने बुधवार को इस्लामाबाद में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान एक नई सैन्य शाखा ‘आर्मी रॉकेट फ़ोर्स’ के गठन की घोषणा की है। यह घोषणा ऐसे समय पर आई है जब भारत-पाक तनाव एक बार फिर उबाल पर है।

क्या है ‘आर्मी रॉकेट फ़ोर्स’?
पाक प्रधानमंत्री के अनुसार, यह फ़ोर्स अत्याधुनिक रॉकेट और मिसाइल टेक्नोलॉजी से लैस होगी, जो भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में निर्णायक भूमिका निभाएगी। पाक रक्षा मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने इसे “स्व-नियंत्रित और रणनीतिक रूप से सुसज्जित इकाई” बताया है। इसका मुख्य उद्देश्य “युद्ध की स्थिति में तीव्र और लक्ष्यभेदी जवाबी हमला” करना है।

ऑपरेशन सिंदूर और उसकी पृष्ठभूमि
7 मई 2025 को, भारतीय सेना ने पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर 9 आतंकी शिविरों को तबाह किया था। इस एक्शन को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित संघर्ष हुआ, जो 10 मई को युद्धविराम समझौते के साथ थमा।
हालांकि, पाकिस्तान की ओर से लगातार घुसपैठ की घटनाएं जारी हैं। 13 अगस्त की रात उरी सेक्टर में बारामूला सैन्य अड्डे पर एक बार फिर आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की, जिसमें एक भारतीय जवान शहीद हो गया। यह दिखाता है कि संघर्ष की आग पूरी तरह शांत नहीं हुई है।
शाहबाज़ शरीफ़ का सख्त संदेश
शाहबाज़ शरीफ़ ने अपने भाषण में कहा, “पाकिस्तान अब चुप नहीं बैठेगा। हमारी ‘आर्मी रॉकेट फ़ोर्स’ आने वाले समय में हमारी संप्रभुता की रक्षा में मील का पत्थर बनेगी।” यह बयान स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान अब पारंपरिक सेना के साथ-साथ रणनीतिक मिसाइल बल पर भी ज़ोर देने जा रहा है।
भारत की रणनीतिक स्थिति
भारत की सैन्य कार्रवाई और ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति अब और अधिक आक्रामक हो चुकी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नई रॉकेट फोर्स की घोषणा, भारत के जवाबी एक्शन से उपजे दबाव का परिणाम है।
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव अब सैन्य स्तर पर नई दौड़ की ओर इशारा कर रहा है। पाकिस्तान की ‘आर्मी रॉकेट फ़ोर्स’ की घोषणा से साफ है कि वह अब भारत के सामने सैन्य ताकत के साथ खड़ा होना चाहता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस नए घटनाक्रम पर क्या रणनीतिक प्रतिक्रिया देता है।
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