Bastar heavy rain : छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में लगातार तीन दिनों से हो रही भारी बारिश ने ग्रामीण इलाकों में तबाही मचा दी है। बारिश और तेज आंधी के चलते कई गांवों में आधा दर्जन से अधिक मकान ढह गए हैं, वहीं कई घरों की छतें भी उड़ गई हैं। स्थानीय लोगों को आशंका है कि अगर बारिश का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा तो फसलों को भी भारी नुकसान हो सकता है।

चक्रवात बना मुसीबत
मौसम विभाग के अनुसार, बस्तर में बने चक्रवात की वजह से इलाके में तीन दिनों से लगातार वर्षा हो रही है। इसका असर सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों पर पड़ा है।
सिदावंड और डुरकाठोंगा गांवों में कई मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर होना पड़ा है।

विधायक मौके पर पहुंचे
बारिश से हुए नुकसान की जानकारी मिलते ही बस्तर विधानसभा के विधायक लखेश्वर बघेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। विधायक ने कहा कि तत्काल राहत राशि स्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि पीड़ित परिवारों को जल्द मदद मिल सके।
पटवारी को दिए निर्देश
विधायक लखेश्वर बघेल ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पटवारी से फोन पर बात कर प्रभावित क्षेत्रों का नुकसान का आकलन (डैमेज रिपोर्ट) तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन जल्द से जल्द नुकसान का सही आंकलन कर प्रभावित परिवारों तक मुआवजा राशि और आवश्यक सामग्री पहुंचाए।
प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात
विधायक बघेल ने जिन परिवारों के मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हुए, उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। इनमें दैमन बघेल, दासरथी बघेल, शंकर बघेल, दिनेश भारती, लखमू और सोमारी मनु शामिल हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी परिवार को बिना मदद के नहीं छोड़ा जाएगा और प्रशासन हरसंभव सहायता करेगा।
फसल नुकसान का खतरा
लगातार बारिश के कारण ग्रामीणों में चिंता है कि खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। अगर मौसम में सुधार नहीं हुआ तो बस्तर के किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। विधायक ने इस मुद्दे पर भी आश्वासन दिया कि सरकार किसानों की स्थिति का आकलन कर उचित मुआवजा और सहायता उपलब्ध कराएगी।
बस्तर में जारी बारिश ने जहां ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है, वहीं कई परिवार अब बेघर हो गए हैं। राहत कार्य शुरू हो चुके हैं और प्रशासन नुकसान का आंकलन करने में जुटा है। अब देखना यह होगा कि सरकार कितनी जल्दी मदद पहुंचाती है और प्रभावित परिवारों को फिर से बसाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है।
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