SIR Issue Bihar : बिहार में SIR (Systematic Investigation of Roll) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग (ECI) के बीच टकराव तेज हो गया है। रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब कांग्रेस सहित विपक्ष के कई दलों ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी, आरजेडी और सीपीएम ने एक सुर में चुनाव आयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की मांग की है।

कांग्रेस ने उठाए सीधे सवाल
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि,”वोट देने का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है। लेकिन चुनाव आयोग विपक्ष के गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय हम पर ही हमले कर रहा है।” गोगोई ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने फर्जी वोटरों की सूची, पोलिंग बूथ के सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल वोटर लिस्ट और प्राइवेसी उल्लंघन जैसे मामलों पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि, “बिहार में अचानक और हड़बड़ी में SIR कराना चुनाव आयोग की नीयत पर सवाल खड़े करता है।”

ज्ञानेश कुमार के बयान पर पलटवार
गौर हो कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा था कि, “यदि राहुल गांधी के पास सबूत हैं, तो 7 दिन में एफिडेविट दें, नहीं तो देश से माफी मांगें।”इस पर विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पलायन कर रहा है और जवाब देने की बजाय राजनीतिक प्रतिक्रिया दे रहा है।
विपक्ष ने EC की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग बिहार में SIR के फैसले, महाराष्ट्र में मतदाता संख्या में भारी बदलाव और अन्य राज्यों में चुनावी अनियमितताओं पर मौन साधे हुए है। आम आदमी पार्टी और आरजेडी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे चुनाव आयोग सत्तारूढ़ दलों के दबाव में काम कर रहा है। वहीं सीपीएम ने स्पष्ट किया कि यदि चुनाव आयोग सही दिशा में नहीं चला तो वो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
‘चुनाव आयोग की निगरानी जरूरी’
विपक्ष ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के कुछ अधिकारी राजनीतिक पक्षपात कर रहे हैं। बयान में कहा गया, “अफसर आएंगे और जाएंगे, लेकिन हम उनपर निगरानी रखेंगे और उचित समय पर उचित कदम उठाएंगे।” बिहार से शुरू हुआ वोटर लिस्ट और SIR का मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है। एक ओर चुनाव आयोग खुद को सही ठहरा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गहराने की संभावना है, खासकर जब यह 2026 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़ा है।
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