Raigarh Intern Doctors Strike: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में MBBS इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रही हड़ताल सोमवार, 10 अगस्त को सातवें दिन भी जारी रही। इंटर्न डॉक्टरों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और लगातार दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं के मुकाबले काफी कम है। इसी बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया है।

प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने दिया समर्थन
इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का समर्थन मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। संघ के जिलाध्यक्ष लीलाधर नायक ने कहा कि राज्य के MBBS इंटर्न डॉक्टर बेहद कम स्टाइपेंड पर काम कर रहे हैं। इसके बावजूद वे अस्पतालों में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से डॉक्टरों की मांग पर जल्द विचार करने की अपील की।

24 घंटे स्वास्थ्य सेवाओं में दे रहे योगदान
लीलाधर नायक के मुताबिक, MBBS इंटर्न डॉक्टरों को प्रशिक्षण के साथ-साथ अस्पतालों में नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ती है। कई बार उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी करनी होती है और 24 घंटे की स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देना पड़ता है। ऐसे में वर्तमान स्टाइपेंड को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। संघ का कहना है कि डॉक्टरों के काम और मेहनत को ध्यान में रखते हुए उचित स्टाइपेंड दिया जाना चाहिए।
दूसरे राज्यों की तुलना में कम स्टाइपेंड
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड अन्य समान राज्यों की तुलना में कम है। संघ के अनुसार, डॉक्टरों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनके स्टाइपेंड में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसी वजह से इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांग सरकार के सामने रखते आ रहे हैं।
30 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड की मांग
इंटर्न डॉक्टरों ने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर 4 अगस्त से काम का बहिष्कार शुरू किया है। वर्तमान में उन्हें 14 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलने की बात कही गई है। डॉक्टरों की मांग है कि इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए। उनका कहना है कि बढ़ी हुई महंगाई और काम की जिम्मेदारियों को देखते हुए मौजूदा राशि पर्याप्त नहीं है।

लंबे समय से उठाई जा रही है मांग
इंटर्न डॉक्टर राधेश्याम ने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग नई नहीं है। डॉक्टरों की ओर से काफी समय से इस विषय को सरकार के सामने उठाया जा रहा है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लगातार मांग पूरी नहीं होने के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया और काम का बहिष्कार शुरू कर दिया।
सरकार से जल्द समाधान की अपील
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार से इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। संघ का कहना है कि डॉक्टरों के आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर जल्द फैसला होने से डॉक्टरों को राहत मिल सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े काम भी प्रभावित होने से बचाए जा सकते हैं।
नर्सिंग स्टाफ के समर्थन की संभावना
इंटर्न डॉक्टर राधेश्याम ने कहा कि फिलहाल स्वास्थ्य कर्मचारी संघ उनके आंदोलन के समर्थन में सामने आया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो नर्सिंग स्टाफ भी आंदोलन को समर्थन दे सकता है। नर्सिंग कर्मचारियों के काम के बहिष्कार की स्थिति में अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
आंदोलन के आगे बढ़ने के संकेत
रायगढ़ में सातवें दिन भी जारी हड़ताल के बीच अब सरकार के अगले कदम पर नजर बनी हुई है। इंटर्न डॉक्टर अपनी 30 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड की मांग पर कायम हैं और फिलहाल आंदोलन खत्म करने के संकेत नहीं दिए हैं। वहीं स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के समर्थन से आंदोलन को और मजबूती मिलने की संभावना है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर कब तक फैसला लेती है और इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए क्या कदम उठाती है।
Read More : Kanker Snakebite: पखांजूर में सर्पदंश से 3 छात्राओं की मौत, 3 गंभीर; कलेक्टर ने दिए जांच आदेश











