Rajnath Singh on Pakistan : भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के हालिया विवादित बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि मुनीर के बयान उनकी “नाकामी” और “कंफेशन” के समान हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ के बयान ने न केवल पाकिस्तान में बल्कि पूरी दुनिया में उनका मज़ाक बना दिया है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “अगर दो देश एक साथ आजाद हुए और एक देश ने कड़ी मेहनत, सही नीतियों और दूरदृष्टि के दम पर एक मजबूत और समृद्ध अर्थव्यवस्था बनाई, जबकि दूसरा आज भी पिछड़ा हुआ है, तो यह उनकी अपनी असफलता है।” उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख का यह बयान एक लुटेरी मानसिकता की ओर इशारा करता है, जो पाकिस्तान के जन्म से ही उनके देश की स्थिति रही है।

ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान की सेना के भ्रम को तोड़ना चाहिए था, लेकिन अब भी हमें सतर्क रहना होगा। उन्होंने जोर दिया कि भारत की आर्थिक समृद्धि, सांस्कृतिक विरासत और रक्षा क्षमता को मजबूत बनाए रखना और राष्ट्रीय सम्मान के लिए लड़ने का जज्बा जीवित रखना आवश्यक है।
नया वर्ल्ड ऑर्डर: भारत का दृष्टिकोण
राजनाथ सिंह ने भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “हमने हमेशा एक ऐसे वर्ल्ड ऑर्डर की कल्पना की है, जिसमें शक्ति उत्तरदायित्व के साथ हो, और इसका उद्देश्य सभी की भलाई हो।” उन्होंने कहा कि भारत शक्ति को आदेश देने की क्षमता के रूप में नहीं, बल्कि देखभाल और वैश्विक भलाई के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में असमानता, असुरक्षा और अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे कई संघर्ष उत्पन्न हुए हैं। ऐसे में जरूरी है कि एक नया, नियम-आधारित और समान अवसर प्रदान करने वाला वर्ल्ड ऑर्डर बनाया जाए, जिसमें सहयोग और सद्भावना हो, न कि प्रतिस्पर्धा और टकराव।
भारत का नेतृत्व जरूरी
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि यह नया वर्ल्ड ऑर्डर भारत के नेतृत्व में ही संभव है। उन्होंने कहा, “हमारी परंपरा सदियों से वैश्विक सद्भाव और सहयोग की है, और आज भी हम इस दृष्टि के साथ दुनिया को एक साझा मंच पर लाना चाहते हैं।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख के बयान को चुनौती देते हुए भारत की समृद्धि और शक्ति पर गर्व जताया। साथ ही उन्होंने एक नए, न्यायसंगत और सहयोगात्मक वैश्विक व्यवस्था के लिए भारत के नेतृत्व की महत्ता पर जोर दिया। उनका यह संदेश न केवल भारत की सुरक्षा नीति को प्रतिबिंबित करता है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दर्शाता है।










