Crisis on Ramgarh heritage : छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने आज पत्रकारवार्ता में परसा ईस्ट-केते एक्सटेंशन कोयला खदान परियोजना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि खदान का लगभग पूरा क्षेत्र वनभूमि है और यहां राजस्व अथवा कृषकों की भूमि नगण्य है। यह इलाका हसदेव अरण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां घने जंगल, विविध वन्यजीव और जल संरक्षण की प्राकृतिक व्यवस्था है, जिसका लाभ आसपास के जिलों को मिलता है।

पत्रकारवार्ता में सिंह देव ने चेतावनी दी कि यदि इस खदान को अनुमति मिलती है, तो न केवल हजारों पेड़ कटेंगे बल्कि जल संकट और पर्यावरणीय आपदा भी सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि इस खतरे को देखते हुए ‘रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति’ नामक गैर-राजनीतिक संस्था का गठन किया गया है, जिसका पंजीकरण भी हो चुका है। भले ही वे सदस्य नहीं हैं, लेकिन संस्था को उनका पूरा समर्थन रहेगा।

रामगढ़ धरोहर और आस्था पर संकट
सिंहदेव ने कहा कि रामगढ़ की पहाड़ी और सीता बेंगरा-जोगीमारा गुफाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहर हैं। यहां हर साल नवरात्र में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और यह स्थल एक प्रमुख धार्मिक व पर्यटन केंद्र है। खदान से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में पहले से ही दरारें दिख रही हैं। लगातार बारिश और खदान में हो रहे विस्फोटों से मिट्टी और पत्थर खिसक रहे हैं, पेड़ उखड़ रहे हैं और रास्ते क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यदि यह दरारें और बढ़ीं तो रामगढ़ पहाड़ी पर जाने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाएगा। यह न केवल आस्था बल्कि हमारी हजारों वर्ष पुरानी धरोहर को भी खतरे में डाल देगा।”
राजनीतिक और धार्मिक आयाम
सिंहदेव ने सरकार पर आरोप लगाया कि अधूरी जानकारी देकर खदान की सहमति ली जा रही है और पूरी प्रक्रिया ही दोषपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरगुजा की पहचान रामगढ़ धरोहर पर संकट गहराता जा रहा है और इसे बचाना सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि परसा ईस्ट-केते एक्सटेंशन से निकलने वाला कोयला राजस्थान विद्युत मंडल को नहीं जाता, बल्कि अन्यत्र भेजा जाता है। ऐसे में बिजली संयंत्र बंद होने का डर निराधार है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुराने राम मंदिर और मूर्ति को खनन के रास्ते में बाधा बनने के कारण हटाया जा रहा है और नए मंदिर के निर्माण की बात सामने आ रही है। सिंहदेव ने कहा, “धर्म और आस्था का नाम लेकर जनता से वोट लेने वाली सरकार अब उसी अस्तित्व को खत्म करने पर आमादा है।”
हाथियों के गलियारे पर भी खतरा
सिंहदेव ने बताया कि खदान से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर हाथियों के लिए बनाए गए लेमरू हाथी रिजर्व क्षेत्र (हाथी गलियारा) पर भी खतरा मंडरा रहा है। विस्फोट और खनन से न केवल सड़कें अवरुद्ध हो रही हैं, बल्कि हाथियों का सुरक्षित रास्ता भी प्रभावित हो रहा है।
राजनीति से ऊपर उठकर पहल की जरूरत
सिंह देव ने कहा कि यह विरोध न तो केंद्र या राज्य सरकार के खिलाफ है और न ही किसी कंपनी के। यह सिर्फ रामगढ़ धरोहर और आस्था स्थल को बचाने के लिए है। उन्होंने साफ कहा कि अगर खदान 10 किलोमीटर की सीमा से बाहर होती तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन इतने करीब इसकी अनुमति “विनाशकारी” साबित होगी।
सिंहदेव ने पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल की भी सराहना की कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से खदान के विरोध की बात कही है। सिंहदेव ने कहा कि यदि राजनीति और व्यावसायिक हितों से ऊपर उठकर पहल की जाए, तो रामगढ़ को बचाया जा सकता है।
समिति न्यायालय तक जाएगी
पर्व उपमुख्यमंत्री सिंह देव ने कहा कि भविष्य में रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति शासन-प्रशासन से लेकर न्यायालय तक जाने के लिए तैयार है और इसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जाएगा। सिंहदेव का स्पष्ट संदेश है कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की धरोहर है, इसे बचाना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।










