Pratappur News : गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ किसानों ने शक्कर कारखाना केरता के बाहर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। वे हाथों में ताले लेकर “शक्कर कारखाना में तालाबंदी करके रहेंगे” के नारे लगाते हुए बैरिकेडिंग के अंदर घुसने का प्रयास करते दिखे। आक्रोशित किसानों ने बैरिकेडिंग को तोड़ने का भी प्रयास किया पर वहां पहले से ही बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। दूसरी तरफ कारखाना प्रबंधन ने शक्कर बिक्री के लिए टेंडर लगने की जानकारी देते हुए पंद्रह दिन में भुगतान का आश्वासन दिया। आंदोलन जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम के नेतृत्व में हुआ जिसमें पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, कारखाना के पूर्व अध्यक्ष विद्यासागर सिंह, सूरजपुर क्षेत्र के पूर्व डीडीसी पंकज तिवारी भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि मां महामाया शक्कर कारखाना में गन्ना बेचने वाले किसानों का करीब चालीस करोड़ रुपए बकाया है। इसी बकाया भुगतान को लेकर आज सोमवार को कारखाना में तालाबंदी के साथ धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी गई थी। आज तय कार्यक्रम के अनुसार बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और किसान कारखाना के बाहर इकट्ठा हो गए थे। वहीं इन्हें तालाबंदी से रोकने बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था।

इससे पहले धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि किसान यहां अपने ही भुगतान के लिए धूप में खड़े होकर आंदोलन कर रहे हैं और सांय सायं सरकार सो रही है। भाजपा सरकार ने कहा था हमारी डबल इंजन की सरकार किसानों की आय दुगुनी करेगी लेकिन यहां तो डबल इंजन की सरकार से धुआं फेंक रहा है और किसान भूखा मर रहा है।
सुरेश आयाम ने कहा कि किसान लंबे समय से गन्ना भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे हैं, पिछले बार हमने आवेदन दिया तो कुछ भुगतान किया गया लेकिन अभी भी करोड़ों बकाया है जो किसानों के लिए परेशानी भरा है। संभाग से मुख्यमंत्री के साथ पांच मंत्री हैं लेकिन यहां के किसान परेशान हैं क्योंकि उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है। कई बार किसानों की परेशानियों को लेकर बातें आती हैं लेकिन आश्चर्य का विषय है कि संभाग में भाजपा के बड़े बड़े नेता होने के बावजूद इन्हें राहत दिलाने प्रयास नहीं हुए। आज हम सड़क पर उतरे हैं और किसानों को भुगतान के रूप में न्याय दिलाकर रहेंगे।
पूर्व डीडीसी पंकज तिवारी ने कहा कि किसान अन्नदाता हैं और उन्हें गन्ना के भुगतान के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है जो दुखदाई है। लेकिन हम किसानों की तकलीफ बर्दाश्त नहीं करेंगे और इनके लिए जहां तक लड़ना होगा लड़ेंगे।धरना प्रदर्शन को त्रिभुवन सिंह टेकाम, सुरेश चक्रधारी, नवीन जायसवाल सहित अन्य ने भी संबोधित किया इसके बाद सभी कारखाना की ओर बढ़े, उनके हाथों में ताले थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकने बैरिकेटिंग कर रखी थी।
आंदोलनकारियों ने बैरिकेटिंग तोड़ने का प्रयास किया लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। अंततः इस आश्वासन के बाद कि टेंडर लगने वाला है और पंद्रह दिन के अंदर भुगतान हो जाएगा, आंदोलन समाप्त हुआ। धरना प्रदर्शन में जनपद पंचायत सदस्य राजू सिंह, कमलेश राजवाड़े व बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान शामिल रहे। इस दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतापपुर एसडीएम ललिता भगत, तहसीलदार चंद्रशिला जायसवाल, एसडीओपी पुलिस अनूप कुमार एक्का, प्रतापपुर थाना प्रभारी अमित कौशिक, चंदौरा थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह, खड़गवां चौकी प्रभारी रघुवंश सिंह, रेवटी चौकी प्रभारी दलबल के साथ मौजूद थे। साथ ही जिला पुलिस के जवान भी तैनात थे।
गन्ना विक्री को लेकर सरकार की पॉलिसी को लेकर दिखा आक्रोश…
दूसरी तरफ सरकार की गन्ना विक्री की पॉलिसी को लेकर भी आक्रोश दिखा और खुले बाजार में सीधी विक्री की मांग उठी। जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम ने कहा कि नान को उधार गन्ना देना तत्काल बंद हो, अगर दिया जाता है तो नगद भुगतान लिया जाए। सरकार को पॉलिसी बदलनी चाहिए जो किसानों के हित में हो। उन्होंने हाइकोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए भी खुले बाजार में सही कीमत पर गन्ना बेचने की मांग की।










