Bangladesh Protest: बांग्लादेश की राजधानी एक बार फिर छात्र आंदोलन की आग में सुलग रही है। इंजीनियरिंग छात्रों द्वारा डिप्लोमा कोटा और भर्ती प्रक्रिया में कथित अन्याय के खिलाफ निकाले गए ‘ढाका तक लंबा मार्च’ को पुलिस ने जबरन रोका, जिसके बाद शाहबाग से जमुना तक का इलाका प्रदर्शन और झड़पों का केंद्र बन गया।

पुलिस और छात्रों में तीखी झड़प
बुधवार दोपहर करीब 1:45 बजे छात्रों ने होटल इंटरकॉन्टिनेंटल के पास पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले और ध्वनि ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। कई छात्र घायल हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग करते हुए बेरहमी से हमला किया। प्रदर्शनकारी यूनुस के आवास की ओर बढ़ रहे थे, जहां उन्हें रोका गया।

क्या हैं छात्रों की माँगें?
ढाका इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के छात्रों ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं:डिप्लोमा इंजीनियरों के नाम के आगे “इंजीनियर” शब्द का इस्तेमाल न किया जाए।डिप्लोमा धारकों को नौवीं ग्रेड की सरकारी नौकरियों में पदोन्नति न दी जाए।स्नातक इंजीनियरों को दसवीं ग्रेड की नौकरियों में प्रवेश का अवसर मिले।छात्रों का कहना है कि कोटा प्रणाली मेधावी छात्रों के साथ अन्याय कर रही है और इससे योग्य उम्मीदवारों के अधिकार छीने जा रहे हैं।
नारों में फूटा आक्रोश
प्रदर्शनकारियों ने ‘समझौता नहीं, संघर्ष चाहिए’, ‘योग्यता के लिए योग्यता’, ‘कोटा के नाम पर अन्याय बंद करो’ जैसे नारे लगाए। छात्र 1 बजे तक माँगें मानने का अल्टीमेटम देकर सचिवालय घेरने की चेतावनी दे चुके थे, जिससे राजधानी में यातायात ठप हो गया।
सरकार का रुख
लोक प्रशासन मंत्रालय के वरिष्ठ सचिव मोहम्मद मोखलेस उर रहमान ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि अगर वे अपनी माँगें संबंधित मंत्रालय के माध्यम से पेश करते हैं, तो उन पर विचार किया जाएगा। सचिव समिति ने भी इस मसले पर बातचीत की संभावना जताई है।
यूनुस के आवास पर क्यों बढ़े छात्र?
छात्रों का आरोप है कि मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के निर्देश पर ही पुलिस ने ‘अत्यधिक बल’ का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि यूनुस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। यूनुस के घर की ओर मार्च को लेकर पुलिस पहले से ही सतर्क थी और किसी भी हाल में छात्रों को पास न जाने देने का आदेश था।
बांग्लादेश में एक बार फिर छात्र आंदोलन शासन और प्रशासन के लिए चुनौती बनकर उभरा है। यदि माँगों पर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह प्रदर्शन और उग्र हो सकता है।










