Saurabh Bhardwaj: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने भाजपा और प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर बड़ा हमला बोलते हुए मंगलवार को उनके आवास पर हुई रेड को “राजनीतिक साजिश” करार दिया। बुधवार को मीडिया के सामने आए भारद्वाज ने पूरे घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए दावा किया कि ईडी की छापेमारी का नतीजा “शून्य” रहा और उनके खिलाफ झूठा केस तैयार करने की कोशिश की गई।
रेड का पूरा ब्यौरा
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, मंगलवार सुबह 7:15 बजे ईडी की टीम उनके घर पहुंची और लगभग 19-20 घंटे तक चली रेड में कोई भी आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। उन्होंने कहा कि ईडी अफसरों ने 43 सवाल पूछे, जिनका उन्होंने विस्तार से जवाब दिया। लेकिन जब उनके बयान पर दस्तखत की बारी आई, तो असिस्टेंट डायरेक्टर मयंक अरोड़ा ने उनके बयान को किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा किया और फिर उसमें से कुछ हिस्से हटाने का दबाव बनाया।
“बयान में फेरबदल की कोशिश”
AAP नेता का आरोप है कि ईडी अधिकारियों ने खुद ही एक नया बयान तैयार किया और उसे उनके नाम से पेश कर उस पर साइन करने को कहा, लेकिन उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया। उनका दावा है कि ईडी ने पहले पंचनामा तैयार करवाया, लेकिन बाद में उसे फाड़ दिया गया।
“पब्लिक डॉक्यूमेंट को बताया गया इनक्रिमिनेटिव”
भारद्वाज ने बताया कि ईडी को उनके घर से सिर्फ दो दस्तावेज मिले — पहला, चुनाव आयोग को दिया गया हलफनामा (जिसे उन्होंने खुद दिया), और दूसरा, स्वास्थ्य विभाग का दिल्ली हाई कोर्ट में दायर 89 पन्नों का हलफनामा, जो एक सार्वजनिक दस्तावेज है। इसके बावजूद, इन दोनों दस्तावेजों को ईडी ने “इनक्रिमिनेटिव” बताकर सीज किया।
“मुझे फंसाने की आपराधिक साजिश”
सौरभ भारद्वाज ने एलजी विनय कुमार सक्सेना पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा मामला उन्हें झूठे केस में फंसाने की आपराधिक साजिश है। उन्होंने बताया कि 9 मार्च 2023 को मंत्री बनने के बाद उन्होंने अस्पताल निर्माण में देरी को लेकर कई बैठकें की थीं और अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए थे, जिनका विवरण “मिनट्स ऑफ मीटिंग” में दर्ज है।
“फॉरेंसिक जांच की मांग”
भारद्वाज ने मांग की है कि ईडी अधिकारी मयंक अरोड़ा के लैपटॉप और उनके प्रिंटर की फॉरेंसिक जांच कराई जाए ताकि उनके असली बयान सामने आ सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, सिवाय पहले पंचनामा के, जिसे बाद में अधिकारियों ने फाड़ दिया। सौरभ भारद्वाज का यह बयान एक बार फिर ईडी की निष्पक्षता और भाजपा पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने के आरोपों को हवा देता है। अब देखना यह होगा कि ईडी और भाजपा इस पूरे प्रकरण पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।
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