PM Modi China Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं। लेकिन यह यात्रा सिर्फ बहुपक्षीय मंच तक सीमित नहीं रहेगी—मोदी इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलग से द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। दोनों मुलाकातें वैश्विक राजनीति में संभावित नई धुरी के संकेत के रूप में देखी जा रही हैं।

अमेरिका की रणनीति को टक्कर?
हाल के हफ्तों में अमेरिका और भारत के रिश्तों में दरारें देखने को मिली हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद बीजिंग खुलकर भारत के पक्ष में आया है। चीन के विदेश मंत्रालय और नई दिल्ली में चीनी राजदूत शू फीहोंग ने अमेरिका की टैरिफ नीति की कड़ी आलोचना की है। ऐसे में मोदी की चीन यात्रा वैश्विक रणनीतिक संतुलन को बदलने का संकेत हो सकती है।

चीन का संदेश: हाथी और अजगर का मेल
बीजिंग ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि वह भारत के साथ मिलकर अमेरिकी आक्रामकता का सामना करना चाहता है। हाल ही में चीनी अधिकारियों ने “हाथी और अजगर का नृत्य” जैसे बयानों से भारत-चीन सहयोग को एक प्रतीकात्मक शक्ति के रूप में पेश किया है। हालांकि भारत अब तक सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया देता आया है, लेकिन इस बार की मोदी-जिनपिंग बैठक नई रणनीतिक दिशा तय कर सकती है।
पहली चीन यात्रा, गलवान के बाद
गौरतलब है कि यह गलवान घाटी झड़प (2020) के बाद मोदी की पहली चीन यात्रा है। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के बीच रिश्तों की बर्फ को पिघलाने का भी काम कर सकती है। मोदी और जिनपिंग की बैठक में व्यापार, सीमा विवाद, और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है।
पुतिन से मुलाकात: रूस-भारत संबंधों की पुनर्स्थापना?
मोदी की यह यात्रा सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहेगी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी SCO बैठक में भाग लेने आ रहे हैं और उनके साथ मोदी की द्विपक्षीय बातचीत तय है। ऐसे में भारत-चीन-रूस त्रिकोण को एक साझा रणनीति में बदलने की कोशिशें देखी जा रही हैं, जो अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति को संतुलित करने की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है।
क्या बनेगी नई वैश्विक धुरी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये मुलाकातें सिर्फ शिष्टाचार तक सीमित नहीं रहेंगी। SCO की बैठक के इतर हो रही ये हाई-प्रोफाइल द्विपक्षीय बातचीत वैश्विक राजनीति में भारत की बदलती भूमिका और नई ध्रुवीकरण की ओर संकेत करती हैं। अमेरिका द्वारा भारत का उपयोग चीन पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा था, लेकिन यदि नई दिल्ली बीजिंग और मॉस्को के साथ नज़दीकी बढ़ाता है, तो यह समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और जिनपिंग-पुतिन से एक ही दिन में होने वाली मुलाकातें वैश्विक कूटनीति में बड़ा मोड़ ला सकती हैं। क्या भारत वास्तव में अमेरिका से दूरी बनाकर एक नई त्रिपक्षीय धुरी की ओर बढ़ेगा? या यह सिर्फ कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश है—इसका उत्तर आने वाले दिनों में सामने आएगा।
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