Ethanol Fuel India : देशभर में गाड़ियों के माइलेज में अचानक आई गिरावट ने वाहन चालकों में चिंता और गुस्सा बढ़ा दिया है। जो कारें पहले 17-18 किलोमीटर प्रति लीटर चलती थीं, वे अब मात्र 13-14 किलोमीटर या इससे भी कम चल रही हैं। कुछ मामलों में माइलेज 8-9 किलोमीटर प्रति लीटर तक गिर गया है। इस समस्या का केंद्र में लाई गई E20 ईंधन नीति को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

E20 ईंधन नीति और वाहन चालकों की परेशानी
केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने की नीति (E20) लागू की है, जिसका मकसद प्रदूषण कम करना और पेट्रोल आयात की लागत घटाना था। लेकिन वाहन चालक इस नीति से खासे नाराज हैं। उनका आरोप है कि E20 पेट्रोल भरवाने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज घट गया है और पुरानी BS-4 मॉडल की गाड़ियां खासतौर पर इससे प्रभावित हो रही हैं। साथ ही, इंजन में खराबी, ईंधन टैंक में जंग लगना, रबर नली की क्षति जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

तेलंगाना के मिलन बरसोपिया जैसे कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इस नीति की आलोचना की है। उन्होंने सीधे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर हमला बोला है, कहा कि इस नीति ने आम लोगों के लिए ईंधन की लागत 30 प्रतिशत तक बढ़ा दी है।
नितिन गडकरी के बेटे की कंपनी की तेजी से बढ़ती कमाई
दिलचस्प बात यह है कि जबकि आम जनता E20 नीति से परेशान है, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी की कंपनी ‘सियान एग्रो इंडस्ट्रीज’ इस नीति के चलते तेजी से फल-फूल रही है। सियान एग्रो ने कार्बन से इथेनॉल का प्रसंस्करण शुरू किया है और इसी वजह से सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का फैसला किया। कंपनी का राजस्व पिछले एक साल में 18 करोड़ रुपये से बढ़कर 510 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
सियान एग्रो के शेयर ने भी पिछले पांच वर्षों में जबरदस्त उछाल मारा है। 2020 में कंपनी का शेयर 29 रुपये था, जो अब 736 रुपये तक पहुंच चुका है। पिछले एक साल में शेयर की कीमत में 508 प्रतिशत और पिछले एक महीने में 69 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
सरकार का तर्क और जनता की नाराजगी
सरकार का तर्क है कि गन्ने और मक्के से इथेनॉल का उत्पादन करने से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 50 से 65 प्रतिशत तक कमी आएगी। साथ ही, पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने से वाहन की परफॉर्मेंस बेहतर होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि वाहन चालकों को इन सुधारों का फायदा नहीं मिल रहा, बल्कि उन्हें गाड़ियों के खराब होने और माइलेज घटने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
भारत में E20 नीति की तुलना अन्य देशों से
ब्राज़ील, यूरोप जैसे देशों में ईंधन के रूप में E5, E10, और E20 का विकल्प उपलब्ध है। वहां उपयोगकर्ता अपनी कार की क्षमता के अनुसार उपयुक्त ईंधन चुन सकते हैं। लेकिन भारत में सरकार ने अचानक E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी, जिससे पुराने मॉडल की कारों के मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
ई20 नीति को लेकर लोगों की बढ़ती नाराजगी के बीच, वकील अक्षय मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने इस नीति को चुनौती देते हुए कहा है कि यह नीति आम जनता के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। इस मामले की सुनवाई 1 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की पीठ करेगी।
E20 नीति के लागू होने के बाद गाड़ियों का माइलेज कम होना और इंजन की खराबी जैसी समस्याओं ने आम जनता में असंतोष बढ़ा दिया है। जबकि सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण और विदेशी मुद्रा बचत का जरिया बताती है, वहीं नितिन गडकरी के बेटे की कंपनी की बढ़ती कमाई इस मुद्दे पर विवाद को और भी गहरा कर रही है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सरकार की प्रतिक्रिया इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।










