रामगढ़ पर्वत पर मंडरा रहा संकट : टीएस सिंह देव ने मुख्यमंत्री को लिखा 6 पृष्ठों का पत्र, केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का विरोध

Ambikapur News : छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सरगुजा की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर रामगढ़ पहाड़ी को संरक्षित करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कोल ब्लाकों में खनन से इस धरोहर के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

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पत्र में सिंहदेव ने उल्लेख किया है कि रामगढ़ की पहाड़ी आदिवासी आस्था और सरगुजा का महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यहीं सीता माता का निवास स्थान माने जाने वाला राम-सीता मंदिर और देश का प्राचीनतम रंगमंच (अम्फीथिएटर) स्थित है। यह स्थान पुरातात्विक और सांस्कृतिक दृष्टि से अतुलनीय है, जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान के लिए आते हैं।

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सिंहदेव ने खनन क्षेत्र से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 26 जून 2025 को वनमंडल अधिकारी द्वारा एक्सटेंशन कोल ब्लाक से संबंधित स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन में 1742 हेक्टेयर भूमि के खनन का उल्लेख है, जिसमें 99 प्रतिशत से अधिक घना वन है और लगभग 4.5 लाख पेड़ काटने का खतरा है। यह क्षेत्र हाथियों का भी पारंपरिक आवास है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने लिखा कि 40-50 हाथियों का यह संवेदनशील क्षेत्र है। यदि खनन हुआ तो मानव-हाथी संघर्ष और बढ़ेगा। रिपोर्ट बताती है कि 2000 से 2023 तक छत्तीसगढ़ में 737 लोगों की मौत हाथी-मानव संघर्ष में हुई है, जिनमें 75 प्रतिशत मौतें उत्तर छत्तीसगढ़ में दर्ज हैं। यही क्षेत्र हसदेव अरण्य से जुड़ा है, जहां पहले से हाथी-मानव संघर्ष गंभीर समस्या है।

पत्र में यह भी बताया गया है कि वर्तमान में संचालित पीईकेबी कोल ब्लाक में अब भी 350 मिलियन टन कोयला शेष है, जो आने वाले 20 वर्षों तक प्रदेश की 4340 मेगावाट क्षमता वाली बिजली परियोजनाओं की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में नए कोल ब्लाकों की आवश्यकता नहीं है। सिंहदेव ने कहा कि एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में खनन की अनुमति देना न केवल प्राकृतिक व जैवविविधता के लिए हानिकारक होगा बल्कि रामगढ़ की धरोहर को भी नष्ट कर देगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जनभावनाओं और वैज्ञानिक रिपोर्टों का सम्मान करते हुए इस क्षेत्र को “नो-गो एरिया” घोषित कर खनन पर रोक लगाई जाए। उन्होंने पत्र में कहा है कि रामगढ़ केवल सरगुजा ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की पहचान है। इसके संरक्षण के लिए शीघ्र निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

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