Sukma Naxal surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिला सुकमा में बड़ी सफलता मिली है, जहां 33 लाख रुपये के इनामी सहित कुल 20 नक्सलियों ने बिना हथियार आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें 9 महिलाएं और 11 पुरुष नक्सली शामिल हैं। ये सभी नक्सली छत्तीसगढ़ सरकार की नई ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति – 2025’ और नियद नेल्ला नार योजना से प्रेरित होकर सरकार के साथ आ गए हैं।

आत्मसमर्पण की पूरी सूची और इनामी राशि
इन 20 नक्सलियों में कई ऐसे हैं जिन पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था। इनमें से दो नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपये, एक नक्सली पर 5 लाख रुपये, चार नक्सलियों पर 2-2 लाख रुपये और चार अन्य नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम था। प्रमुख आत्मसमर्पणकर्ताओं में शामिल हैं:

शर्मिला उर्फ उईका भीमे (इनाम 8 लाख)
ताती कोसी उर्फ परमिला (इनाम 8 लाख)
मुचाकी हिड़मा उर्फ बुयूर (इनाम 5 लाख)
मड़कम/ताती देवे (इनाम 2 लाख)
कई अन्य नक्सली जिनके नामों और पदों के साथ इनाम राशि भी शामिल है।
आत्मसमर्पण की प्रक्रिया और सरकारी अधिकारी मौजूद रहे
3 सितंबर 2025 को सुकमा जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण, डीआईजी ऑफिस के द्वितीय कमान अधिकारी सुरेश सिंह पायल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा, डीएसपी (नक्सल ऑप्स) मनीष रात्रे और 218वीं वाहिनी सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट आशीष सिंह की मौजूदगी में सभी नक्सलियों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया।
नक्सलियों ने क्यों किया आत्मसमर्पण?
पुलिस की लगातार कार्रवाई और कैंप स्थापित करने के कारण सुरक्षा बलों का प्रभाव अंदरूनी इलाकों में बढ़ा है। इसके अलावा, नक्सलियों की अमानवीय विचारधारा, बाहरी कमांडरों द्वारा आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार और शोषण ने स्थानीय नक्सलियों को सरकार के पास आने पर मजबूर किया है। छत्तीसगढ़ सरकार की नई नक्सली आत्मसमर्पण नीति ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति – 2025
सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रोत्साहित करने के लिए नई नीति बनाई है। इस नीति के तहत सभी नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें पुनर्वास और समुचित सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी, ताकि वे मुख्यधारा में लौटकर एक नई जिंदगी शुरू कर सकें।
छत्तीसगढ़ के सुकमा में 20 नक्सलियों का आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों और सरकार की संयुक्त रणनीति की सफलता है। आत्मसमर्पण नीति और पुनर्वास योजनाएं न केवल नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेंगी, बल्कि प्रभावित युवाओं को बेहतर भविष्य भी प्रदान करेंगी। यह कदम क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।










