Afghanistan earthquake 2025: अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के मुताबिक, 4 सितंबर 2025 को दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर था। इस भूकंप के झटके पाकिस्तान और दिल्ली सहित आसपास के इलाकों में भी महसूस किए गए।

यह घटना चार दिन पहले आए भीषण भूकंप के बाद आई है, जिसने अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में व्यापक तबाही मचाई है। पहले आए भूकंप से मरने वालों की संख्या 1,457 हो चुकी है, जबकि 3,394 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 6,700 से ज्यादा घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और राहत एजेंसियां अभी भी दूरदराज के क्षेत्रों में फंसे पीड़ितों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

भीषण भूकंप से तबाही और राहत कार्य की चुनौतियां
कुनार प्रांत में हुए पहले भूकंप ने स्थानीय लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। मलबे में फंसे शव निकाले जा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव कार्य अभी भी अधूरा है। पीड़ित क्षेत्र में पानी, भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है, जिससे हालात और बदतर हो रहे हैं। तालिबान प्रशासन ने दावा किया है कि कई परिवारों तक मानवीय सहायता पहुंचाई गई है और प्रभावित इलाकों की सड़कें खोल दी गई हैं। इसके साथ ही कई देशों की विशेष बचाव टीमें भी राहत कार्यों में सक्रिय हैं।
दुर्गम पहाड़ी इलाकों और भूस्खलन की आशंका के कारण राहत कार्यों में काफी दिक्कतें आ रही हैं। भारी तबाही के चलते सबसे ज्यादा जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
पिछले भूकंप और भूकंपीय संवेदनशीलता
31 अगस्त 2025 को अफगानिस्तान में 6.0 तीव्रता का भूकंप भी आया था, जो रात 11:47 बजे स्थानीय समय पर आठ किलोमीटर की गहराई पर महसूस किया गया। यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराव क्षेत्र में आता है, जिससे यह भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। साथ ही, पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका राहत कार्यों को और जटिल बना देती है।
अंतरराष्ट्रीय सहायता और सहयोग
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत कार्यों में रेड क्रॉस, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य एजेंसियां जुटी हैं। भारत, जापान, ईरान, तुर्की समेत कई देशों ने राहत सामग्री भेजी है। हालांकि, दुर्गम इलाकों में पहुंच की दिक्कतों के कारण जरूरी सामग्री और चिकित्सा सेवाओं की आपूर्ति में देरी हो रही है।
यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है, जहां अक्टूबर 2023 में भी एक भूकंप से 1,500 से अधिक लोग मारे गए थे। 2022 में भी इसी क्षेत्र में एक अन्य भूकंप ने लगभग 1,000 लोगों की जान ली थी। लगातार आने वाले इन भूकंपों से स्थानीय आबादी की सुरक्षा और जीवन-यापन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
अफगानिस्तान में लगातार भूकंपों की आहट और भारी तबाही चिंता का विषय बनी हुई है। इन प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और त्वरित राहत कार्य बेहद जरूरी हैं। खासकर दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने के लिए विशेष रणनीतियां अपनाने की आवश्यकता है ताकि पीड़ितों को समय पर आवश्यक मदद मिल सके। अफगानिस्तान की सुरक्षा और विकास के लिए इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से निपटना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।










