Blood Moon 2025: 82 मिनट ही क्यों दिखा ब्लड मून? जानिए पूर्ण चंद्रग्रहण के पीछे की असली वजह

Blood Moon 2025: 8 सितंबर 2025 की रात भारत समेत दुनियाभर के कई हिस्सों में आसमान ने एक अद्भुत दृश्य पेश किया पूर्ण चंद्रग्रहण, जिसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। यह खगोलीय घटना भारत में रात 9:58 बजे शुरू हुई और इसका पूर्ण चरण 11:01 बजे से 12:23 बजे तक यानी 82 मिनट तक दिखाई दिया। लोगों ने बिना किसी विशेष उपकरण के चंद्रमा को गहरे लाल या नारंगी रंग में देखा, जो कि इस घटना को ब्लड मून का नाम देता है।

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आखिर क्यों दिखता है चंद्रमा लाल?

जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली लाल रंग की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। यही कारण है कि पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल दिखाई देता है।

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इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक “रेले स्कैटरिंग (Rayleigh Scattering)” कहते हैं। इसमें पृथ्वी का वातावरण सूर्य की नीली किरणों को बिखेर देता है और केवल लाल या नारंगी रोशनी ही चंद्रमा तक पहुंचती है।

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82 मिनट ही क्यों रहा ब्लड मून?

पूर्ण चंद्रग्रहण का ब्लड मून चरण तभी दिखाई देता है जब चंद्रमा पृथ्वी की सबसे गहरी छाया यानी उंब्रा (Umbra) में पूरी तरह प्रवेश कर जाता है। यह स्थिति हमेशा ज्यादा समय तक नहीं रहती, क्योंकि चंद्रमा लगातार अपनी कक्षा में घूमता रहता है। इस बार चंद्रमा ने 82 मिनट तक उंब्रा में रहते हुए ब्लड मून का नजारा दिया, जो खगोलशास्त्र की दृष्टि से औसतन एक लंबा समय है।

इसके पहले और बाद में चंद्रमा पेनुंब्रा (Penumbral) और आंशिक छाया में रहा, जहां उसका कुछ हिस्सा ही ढंका होता है या हल्की छाया पड़ती है।

प्रमुख शहरों से दिखा अद्भुत दृश्य

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलुरु, नैनीताल सहित भारत के अधिकतर शहरों में मौसम साफ रहने के कारण लोगों ने इस अनोखे खगोलीय नजारे को देखा। कई लोगों ने इसे मोबाइल कैमरे और DSLR से रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर #BloodMoon2025 के साथ तस्वीरें साझा कीं।

क्यों खास होता है चंद्रग्रहण?

चंद्रग्रहण को लेकर दुनियाभर की संस्कृतियों में अलग-अलग मान्यताएं रही हैं। भारत में भी इसे ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता रहा है। हालांकि आधुनिक विज्ञान इसे एक प्राकृतिक खगोलीय घटना मानता है, जो पृथ्वी और चंद्रमा की गति और कक्षा के बारे में वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी देती है।

Blood Moon 2025 न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के रूप में भी एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। 82 मिनट तक चले इस ब्लड मून ने यह सिद्ध किया कि आसमान में घटने वाली घटनाएं आज भी लोगों के लिए उतनी ही आकर्षक और रहस्यमय हैं।

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