Badrinath Dham Case : राम मंदिर चढ़ावा विवाद की सुर्खियों के बीच, अब उत्तराखंड के चमोली स्थित प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम भी दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर मंदिर प्रबंधन के खिलाफ लगे इन आरोपों ने तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के बीच हलचल मचा दी है। इस संवेदनशील मामले को देखते हुए श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने तत्काल प्रभाव से एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है। यह समिति अब मामले की तह तक जाकर सच्चाई का पता लगाने के लिए सक्रिय हो गई है।

पारदर्शी जांच के लिए सीसीटीवी और साक्ष्यों की पड़ताल
मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा गठित यह जांच टीम पूरी निष्पक्षता से काम कर रही है। अधिकारियों ने मंगलवार को जानकारी दी कि समिति ने अपनी पड़ताल शुरू कर दी है, जिसमें मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की गहन जांच शामिल है। इसके अलावा, समिति उन सभी व्यक्तियों के बयान भी दर्ज करेगी जो इस मामले से किसी भी तरह जुड़े हैं। समिति का लक्ष्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपों की सत्यता को परखना है। प्रबंधन का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी और जो भी सच्चाई होगी, वह सार्वजनिक की जाएगी।

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन
जांच समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इन आरोपों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि मंदिर की पवित्रता और भक्तों की आस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समिति को अपना काम पूरा करने के लिए एक सप्ताह से 10 दिनों का समय दिया गया है। जैसे ही प्रारंभिक रिपोर्ट प्राप्त होगी, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर जैसे ही अनियमितताओं के आरोप सामने आए, मंदिर समिति ने बिना समय गंवाए जांच के आदेश दे दिए थे, ताकि मामले को दबाने के बजाय पारदर्शिता बनी रहे।

विपक्ष का हमला: कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग
अयोध्या के बाद बद्रीनाथ धाम पर लगे आरोपों को कांग्रेस ने बड़ा चुनावी और राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने धामी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सनातन धर्म के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा नियुक्त लोगों पर ही कीमती आभूषणों, रत्नों और चढ़ावे में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। गोदियाल ने पूरे मामले की न्यायिक जांच या विधानसभा की संयुक्त समिति से जांच कराने की मांग की है। वहीं, मंदिर समिति ने कहा कि यदि प्रारंभिक जांच में और बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता महसूस हुई, तो शासन के समक्ष बड़े स्तर पर जांच का प्रस्ताव रखा जाएगा।
बद्रीनाथ धाम की महिमा और लैपटॉप विवाद पर स्पष्टीकरण
इस बीच, मंदिर समिति को दान में मिले लैपटॉप के गायब होने की चर्चाओं पर उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व एक बैंक द्वारा दिए गए आठ लैपटॉप कर्मचारियों को समिति के आधिकारिक कार्यों के लिए आवंटित किए गए थे, वे गायब नहीं हुए हैं। बद्रीनाथ धाम, जो अलकनंदा के तट पर स्थित है, भगवान विष्णु का प्रमुख तीर्थ स्थल है। नर-नारायण पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित यह धाम न केवल सांस्कृतिक बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी करोड़ों हिंदुओं के लिए सर्वोच्च आस्था का केंद्र है।
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