Mehul Choksi Extradition : भारत के सबसे चर्चित आर्थिक भगोड़े मेहुल चोकसी को देश वापस लाने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। देश के लगभग 13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले में आरोपी चोकसी को भारत लाने के लिए सरकार बेल्जियम के न्याय मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संवाद कर रही है। इस बीच भारत सरकार ने गृह मंत्रालय के जरिए एक विस्तृत पत्र जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि चोकसी को भारत लाए जाने के बाद उसे जेल में किन सुविधाओं के साथ रखा जाएगा। क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं? सरकार की ओर से यह पत्र बेल्जियम को इसलिए सौंपा गया है ताकि मानवाधिकारों को लेकर किसी भी आशंका को दूर किया जा सके और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके। पत्र में मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 को मेहुल चोकसी के लिए आरक्षित बताया गया है, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विशेष सुविधाएं दी जाएंगी: 1. रहने की व्यवस्था: कम से कम 3 वर्ग मीटर का निजी स्थान। साफ मोटी चटाई, तकिया, चादर और कंबल। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर की सिफारिश पर लकड़ी या लोहे का बेड भी मिलेगा। 2. सुरक्षा और निगरानी: बैरक में ग्रिल वाली खिड़कियां, वेंटिलेटर और सीलिंग फैन। 24×7 CCTV निगरानी। बैरक मुख्य जेल परिसर से अलग है, जहां सिर्फ अहिंसक कैदी ही रखे जाते हैं। 3. खाना और स्वास्थ्य सुविधाएं: दिन में तीन बार पर्याप्त भोजन। डॉक्टर की सलाह पर विशेष डाइट की व्यवस्था। जेल में 20 बिस्तरों वाला ICU क्षमता वाला अस्पताल। 6 मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग स्टाफ और फार्मासिस्ट उपलब्ध। आपात स्थिति में पास के बड़े अस्पताल में रेफर किया जाएगा। 4. अन्य सुविधाएं: प्रतिदिन खुले में व्यायाम की अनुमति। मनोरंजन के लिए बैडमिंटन और बोर्ड गेम्स। वकीलों से मुलाकात की सुविधा रोजाना। टेलीफोन और वीडियो कॉल की सुविधा। क्यों दी गई ये जानकारी? बेल्जियम सरकार ने प्रत्यर्पण प्रक्रिया में मानवाधिकारों और हिरासत की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। भारत सरकार ने इन चिंताओं को दूर करते हुए आश्वस्त किया कि चोकसी को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हिरासत में रखा जाएगा। यह भी कहा गया है कि उसकी स्वास्थ्य स्थिति का पूरा ध्यान रखा जाएगा और उपयुक्त उपकरण व दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। किन धाराओं में दर्ज हैं केस? मेहुल चोकसी पर भारत में भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं: धारा 120-बी: आपराधिक षड्यंत्र धारा 409: आपराधिक विश्वासघात धारा 420: धोखाधड़ी धारा 477A और 201: दस्तावेजों में गड़बड़ी और साक्ष्य मिटाना इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (POCA), 1988 की धाराएं भी लागू हैं। भारत सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर संभव कानूनी और राजनयिक कदम उठा रही है ताकि मेहुल चोकसी को भारत लाया जा सके। बेल्जियम को भेजा गया यह विस्तृत पत्र बताता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकारों का पालन करते हुए मामले को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब देखना यह होगा कि बेल्जियम सरकार भारत के इन आश्वासनों को कब और कैसे प्रत्यर्पण की मंजूरी में तब्दील करती है। Read More : Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार द्वीप प्रोजेक्ट,राहुल गांधी ने जताई गंभीर चिंता, शेयर किया सोनिया गांधी का आलेख














