Ram Mandir: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण के अंतिम चरण में एक खास पहल की है। अयोध्या के राम जन्मभूमि स्थल पर एक गिलहरी की मूर्ति स्थापित की गई है, जो मंदिर की ओर देखती हुई प्रतीत होती है। इस मूर्ति के माध्यम से रामायण में गिलहरी की प्रतीकात्मक भूमिका को श्रद्धांजलि दी गई है।

गिलहरी की भूमिका रामायण में
रामायण के अनुसार, भगवान राम की लंका विजय के दौरान जब राम सेना समुद्र पार कर राम सेतु का निर्माण कर रही थी, तब एक छोटी गिलहरी ने भी इस प्रयास में अपना अहम योगदान दिया था। गिलहरी ने अपने छोटे-छोटे पत्थरों को समुद्र में फेंककर राम सेतु निर्माण में मदद की थी। यह समर्पण और निष्ठा आज भी भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसलिए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट ने इस गिलहरी को एक विशेष स्थान दिया है।

मूर्ति की स्थापना और उसका स्थान
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मंगलवार को इस महत्वपूर्ण कदम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मूर्ति ‘अंगद टीला’ पर स्थापित की गई है, जो मंदिर के समीप एक ऐसा स्थल है जहां से यह प्रतीत होता है कि गिलहरी मंदिर की ओर देख रही हो। मिश्रा ने कहा “जैसे-जैसे राम मंदिर निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, हमने उस गिलहरी को सम्मानित किया है जिसने लंका विजय में राम सेतु निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।”
राम मंदिर निर्माण की प्रगति
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मंदिर निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और अब गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। साथ ही, उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर परिसर के चारों ओर चार किलोमीटर लंबी चारदीवारी बनाई जाएगी, जिसके साथ 25 निगरानी टावर भी स्थापित किए जाएंगे। सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन के साथ विस्तृत चर्चा होने वाली है ताकि तीर्थयात्रियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जा सके।
अयोध्या का विकास और पर्यटन
मिश्रा ने कहा कि मंदिर दर्शन के बाद देश-विदेश के तीर्थयात्रियों के लिए कई अन्य आकर्षण भी विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य अयोध्या को एक प्रमुख पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करना है, जिससे न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी क्षेत्र का विकास हो सके।
प्रतीकात्मक महत्व
राम जन्मभूमि पर गिलहरी की इस मूर्ति की स्थापना भक्ति, समर्पण और सामूहिक प्रयास की भावना का प्रतीक है। यह मूर्ति मंदिर निर्माण में लगे हर व्यक्ति की मेहनत और लगन का सम्मान करती है। गिलहरी का यह छोटा सा योगदान हमें यह सिखाता है कि निष्ठा और समर्पण से किया गया हर प्रयास महत्वपूर्ण होता है।
अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में स्थापित गिलहरी की यह मूर्ति न केवल रामायण की कथा को जीवंत करती है, बल्कि यह समर्पण और सेवा की भावना को भी दर्शाती है। जैसे-जैसे मंदिर निर्माण अपनी पूर्णता की ओर बढ़ रहा है, यह मूर्ति भक्तों के लिए एक नई प्रेरणा और श्रद्धा का केंद्र बनेगी।










