Pervez Musharraf Ultimatum: पाकिस्तान के क्रिकेट इतिहास में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन कुछ खिलाड़ियों की कहानी आज भी चर्चा में रहती है। ऐसी ही एक कहानी है पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया की, जिनके साथ न केवल विरोधी बल्कि अपनी ही टीम के खिलाड़ियों ने भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न किया। इस उत्पीड़न के कारण उनका करियर लंबा नहीं चल सका। इतना ही नहीं, स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को सख्त चेतावनी दी कि यदि दानिश कनेरिया को कोई छेड़ेगा तो वह उसकी खैर नहीं होंगे। दानिश कनेरिया ने किया बड़ा खुलासा दानिश कनेरिया ने एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू में इस बारे में खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 2000 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत के बाद से ही उन्हें टीम के अंदर भेदभाव और परेशानियों का सामना करना पड़ा। खासकर पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी उनसे अक्सर विवादित बातें करते थे और उनके धर्म का मजाक उड़ाते थे, जिससे मानसिक तनाव काफी बढ़ गया। दानिश ने बताया कि कई खिलाड़ियों को उनकी मौजूदगी पसंद नहीं थी क्योंकि उन्हें डर था कि अगर दानिश अच्छा प्रदर्शन करेंगे तो वे रिकॉर्ड तोड़ देंगे और अपनी पहचान बनाएंगे। उस समय दानिश टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में चौथे नंबर पर थे, जो उनके लिए टीम के कुछ खिलाड़ियों के लिए खतरे की घंटी बन गया था। परवेज मुशर्रफ का सख्त अल्टीमेटम दानिश के अनुसार, जब टीम के अंदर यह माहौल बिगड़ता गया, तब तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने टीम के खिलाड़ियों को फोन करके कड़ा संदेश दिया कि यदि किसी ने भी दानिश कनेरिया को परेशान किया या छेड़ा, तो वह उसे सजा देंगे। इस अल्टीमेटम के बाद ही दानिश को थोड़ी राहत मिली, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। दानिश कनेरिया का क्रिकेट करियर दानिश कनेरिया ने पाकिस्तान की तरफ से लगभग 10 साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उन्होंने कुल 61 टेस्ट मैचों में 112 पारियों में 261 विकेट लिए। यह रिकॉर्ड उन्हें पाकिस्तान के सबसे सफल स्पिन गेंदबाजों में शुमार करता है। टेस्ट क्रिकेट में पाकिस्तान के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले स्पिनर के रूप में उनकी पहचान है। दानिश कनेरिया इस सूची में चौथे नंबर पर हैं, जिनके ऊपर सिर्फ वसीम अकरम, वकार यूनिस और इरमान खान जैसे दिग्गज गेंदबाज हैं। उनका वनडे करियर भी अच्छा था, जिसमें उन्होंने 18 मैचों में 15 विकेट लिए। हालांकि, भले ही उनका करियर पूरी तरह फलता-फूलता न रह पाया, लेकिन दानिश ने अपनी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण से अपना एक अलग मुकाम बनाया। दानिश कनेरिया की कहानी न केवल क्रिकेट के लिए बल्कि सामाजिक भेदभाव और टीम भावना के लिए भी एक बड़ा सबक है। उनकी बहादुरी और संघर्ष ने दिखाया कि किस तरह भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के बीच भी एक खिलाड़ी ने अपनी पहचान बनाई। परवेज मुशर्रफ का हस्तक्षेप इस बात का प्रमाण था कि खेल में हर खिलाड़ी को समान सम्मान मिलना चाहिए। Read More: Param Sundari Flop: सिद्धार्थ मल्होत्रा-जाह्नवी कपूर की ‘परम सुंदरी’ भी फ्लॉप, बॉक्स ऑफिस पर नहीं बना सकी धमाल














