KP Sharma Oli Statement: नेपाल में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है। 9 सितंबर को पद से इस्तीफा देने के बाद से गायब चल रहे ओली ने 10 सितंबर की देर शाम शिवपुरी से एक लिखित बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने न केवल आंदोलन में मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि दी, बल्कि देश के युवाओं, खासतौर पर Gen-Z को संबोधित करते हुए शांति और जिम्मेदारी की अपील की।

कहां हैं ओली? अब हुआ खुलासा
ओली के इस्तीफे के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि वह देश छोड़कर जा चुके हैं। लेकिन अब पुष्टि हो चुकी है कि पूर्व पीएम ओली काठमांडू से हेलीकॉप्टर के जरिए निकलकर शिवपुरी में नेपाली सेना की सुरक्षा में हैं। सरकार या पार्टी की ओर से पहले इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की गई थी, जिससे अटकलें और बढ़ गई थीं।

हिंसा पर जताया दुख, युवाओं को चेताया
पूर्व प्रधानमंत्री ने अपने बयान में 8 सितंबर को पुलिस फायरिंग में मारे गए युवाओं को “राज्य की असफलता के शिकार” बताते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि “जो कुछ भी हो रहा है, वह सिर्फ एक जनआंदोलन नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ ताकतें हैं जो युवाओं को उकसाकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं।” ओली ने विशेष रूप से Gen-Z यानी युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि “विरोध करना अधिकार है, लेकिन आगजनी, हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना राष्ट्रविरोधी गतिविधि है। देश की नींव को कमजोर करना, भविष्य से खिलवाड़ है।”
क्या है नेपाल में चल रहा संकट?
नेपाल में 8 सितंबर से शुरू हुआ यह जनआंदोलन मुख्य रूप से महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ था। लेकिन धीरे-धीरे आंदोलन हिंसक रूप लेता गया, जिसमें कई सरकारी इमारतों में आगजनी हुई और सुरक्षाबलों से झड़पें हुईं। अब तक पुलिस फायरिंग में चार युवाओं की मौत हो चुकी है। इस बीच गृह मंत्री रमेश लेखक ने 8 सितंबर को इस्तीफा दिया और इसके अगले दिन, ओली ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया। इसके बावजूद आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा।
प्रदर्शनकारियों की मांगें
प्रदर्शनकारी न्यायिक जांच, पुलिस सुधार, भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई और युवाओं को रोजगार देने जैसी मांगें कर रहे हैं। साथ ही कई प्रदर्शनकारी ओली की गिरफ्तारी की मांग भी कर रहे थे, जिसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी कि वे देश में हैं भी या नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओली का यह बयान आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल प्रदर्शन की तीव्रता में कमी आई है, लेकिन युवाओं का गुस्सा और अविश्वास अब भी बना हुआ है।
पूर्व पीएम ओली का शिवपुरी से आया बयान कई मायनों में अहम है। उन्होंने जहां एक ओर शहीद युवाओं को श्रद्धांजलि दी, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के पीछे “षड्यंत्रकारी ताकतों” का जिक्र कर राजनीतिक मोर्चे को नया रंग दे दिया। अब देखना होगा कि ओली की अपील के बाद आंदोलन की गति धीमी होती है या और तेज होती है।
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