Gen-Z Nepal Politics: नेपाल की राजनीति इस समय गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद देश में जारी अस्थिरता और बढ़ती हिंसा ने हालात को और जटिल बना दिया है। बुधवार को Gen-Z के एक गुट ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन इसी संगठन के दूसरे गुट ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इस मतभेद के बाद राजधानी काठमांडू में विभिन्न छात्र समूहों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

कर्फ्यू के बावजूद सड़कों पर छात्र
हालात को काबू में करने के लिए सेना ने एक बार फिर काठमांडू में कर्फ्यू लागू कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद छात्रों का आक्रोश कम नहीं हुआ है। उन्होंने कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया और “सेना का राज नहीं चाहिए” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि लोकतंत्र की रक्षा की जाए और सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाए।

संवैधानिक संकट के बीच सुशीला कार्की का नाम
Gen-Z के एक धड़े का कहना है कि सुशीला कार्की जैसी निष्पक्ष और अनुभवी शख्सियत को अंतरिम नेतृत्व सौंपा जाना चाहिए ताकि राजनीतिक गतिरोध खत्म हो सके। हालांकि, संविधान के तहत सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने का स्पष्ट रास्ता नहीं है। इसके बावजूद, कुछ प्रतिनिधि ‘आवश्यकता के सिद्धांत’ के तहत उनके नाम पर विचार करने की वकालत कर रहे हैं।
युवा संगठनों की शांति की अपील
देशभर के कई प्रमुख युवा संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर छात्रों और युवाओं से शांति और संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। इन संगठनों ने सरकार, सेना और राष्ट्रपति से संविधान के दायरे में रहते हुए समाधान खोजने की अपील की है।
हिंसा में अब तक 35 मौतें
सोशल मीडिया पर बैन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ यह जन आंदोलन अब तक 35 लोगों की जान ले चुका है, जबकि 1,338 से अधिक लोग घायल हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश में अस्थायी रूप से सैन्य शासन लागू कर दिया गया है। बावजूद इसके, छात्रों और युवा संगठनों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा।
नेपाल इस समय संवैधानिक और राजनीतिक संकट के गंभीर मोड़ पर खड़ा है। जहां एक ओर युवा पीढ़ी बदलाव की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सेना और सत्ता प्रतिष्ठान के रुख ने अस्थिरता को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या देश के नेता संविधान के दायरे में रहकर इस संकट का समाधान निकाल पाएंगे या टकराव और गहराएगा।
Read More: Asia Cup Hockey 2025: एशिया कप हॉकी 2025 में भारत की पहली हार, इन गलतियों ने तोड़ दिया दिल










