Bihar politics 2025: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज़ हो गई है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिहार की जनता अब सिर्फ़ वादों से संतुष्ट नहीं होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक बिहार से पलायन नहीं रुकेगा और यहां पर कारखाने नहीं लगेंगे, तब तक कोई भी नेता वोट की उम्मीद कैसे कर सकता है?

प्रशांत किशोर ने कहा, “यहां आने का अधिकार सबको है क्योंकि ये लोकतंत्र है। पीएम मोदी आ सकते हैं, अमित शाह आ सकते हैं और राहुल गांधी भी आ सकते हैं, ये बिहार की जनता की ताकत है कि सबको इस धरती पर आना होगा। उन्हें बताना होगा कि बिहार से पलायन कब रुकेगा और बिहार में कारखाने कब लगेंगे।”

“गुजरात में फैक्ट्री लग रही है, इसका मतलब बिहार में वोट नहीं मिलेगा”
प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ यह बताना कि गुजरात में विकास हो रहा है, बिहार के वोटरों को संतुष्ट करने के लिए काफी नहीं है। “सिर्फ़ ये कहकर कि गुजरात में कारखाने लग रहे हैं, बिहार में वोट नहीं जीत सकते,” उन्होंने कहा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमित शाह ने बिहार के कई जिलों में जनसभाएं की हैं और राज्य में NDA को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज यात्रा पिछले कई महीनों से ज़मीनी स्तर पर सक्रिय है और वह लगातार बिहार के युवाओं, किसानों और बेरोज़गारों के मुद्दे उठा रहे हैं।
बिहार में रोजगार और पलायन बना बड़ा चुनावी मुद्दा
बिहार में हर चुनाव से पहले यह मुद्दा उठता रहा है कि राज्य के युवाओं को रोज़गार के लिए दिल्ली, मुंबई, पंजाब या गुजरात क्यों जाना पड़ता है। प्रशांत किशोर की यह टिप्पणी इसी संदर्भ में की गई है। उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि अब बिहार की जनता ठोस विकास योजनाओं और रोजगार के अवसरों की मांग कर रही है, न कि केवल नारों और वादों से संतुष्ट होने वाली है।
प्रशांत किशोर का यह बयान बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। जैसे-जैसे 2025 का चुनाव नज़दीक आता जा रहा है, यह साफ़ है कि रोजगार, पलायन और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दे एक बार फिर केंद्रीय बिंदु बनेंगे। अब देखना यह है कि बीजेपी और अन्य दल इन सवालों का क्या जवाब देते हैं।










