Ambikapur News : छत्तीसगढ़ प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ एक बार फिर अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के दरवाज़े पर दस्तक दे रही हैं। भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ ने मुख्यमंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री को ज्ञापन भेजकर मध्यप्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर मानदेय में बढ़ोतरी तथा अन्य सुविधाएँ तत्काल लागू करने की मांग उठाई है।

संघ का कहना है कि पिछले कई वर्षों से बार-बार आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बावजूद न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया। उल्टे कार्य का बोझ लगातार बढ़ता गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि आज उन्हें 6 घंटे के बजाय 10-12 घंटे तक काम करना पड़ता है। ऑनलाइन काम के लिए प्रशिक्षण और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, मोबाइल में लगातार नए-नए ऐप डाउनलोड करने के निर्देश आते हैं और नेटवर्क समस्या के कारण मानदेय कटौती भी हो रही है।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
संघ की प्रमुख मांगें :
◆ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक यह संभव नहीं है, तब तक उन्हें सम्मानजनक न्यूनतम मानदेय दिया जाए।
◆ मध्यप्रदेश और हरियाणा की तरह छत्तीसगढ़ में भी मानदेय व अन्य सुविधाओं की समान व्यवस्था की जाए तथा हर वर्ष मानदेय वृद्धि का नियम लागू किया जाए।
◆ पोषण ट्रेकर एप से जुड़ी तकनीकी व नेटवर्क समस्याओं को मानदेय से न जोड़ा जाए और जल्द समाधान किया जाए।
◆ कार्यकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा, ईपीएफ, पेंशन व अन्य भत्तों का लाभ मिले। रिटायरमेंट राशि 5 लाख रुपए निर्धारित की जाए और इसका भुगतान एक माह के भीतर हो।
प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं का कहना है कि उनके बिना पोषण अभियान और महिला-बाल विकास की योजनाएँ सफल नहीं हो सकतीं, लेकिन सरकार उन्हें नज़रअंदाज़ कर रही है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार उनकी आवाज़ को कितनी जल्दी सुनती है।










