Dead Officer Transfer: छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की हालिया तबादला सूची में गंभीर लापरवाही सामने आई है। विभाग ने एक ऐसे उप अभियंता का तबादला कर दिया, जिसकी मौत दो महीने पहले ही हो चुकी है। यह चौंकाने वाला मामला तब उजागर हुआ जब विभाग ने 18 सितंबर 2025 को अधिकारियों-कर्मचारियों की स्थानांतरण सूची जारी की, जिसमें मृतक उप अभियंता योगानंद सोम का नाम भी शामिल था।

क्या है पूरा मामला?
18 सितंबर को जारी की गई स्थानांतरण सूची में कुल 267 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम थे। इस सूची में सहायक अधीक्षक, उप अभियंता, कार्यपालन अभियंता और प्रभारी इंजीनियर जैसे पद शामिल थे। इसी सूची के क्रमांक 18 पर मृतक उप अभियंता योगानंद सोम का नाम दर्ज था। आदेश के अनुसार, उनका तबादला नगर पालिका परिषद दल्लीराजहरा से नगर पंचायत तुमगांव किया गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि योगानंद सोम की मृत्यु दो महीने पहले ही हो चुकी थी। बावजूद इसके, उनका नाम तबादला सूची में शामिल किया जाना विभागीय लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गया।

जब सामने आई गलती, तो बदली गई सूची
जैसे ही यह चूक विभाग के संज्ञान में आई, नई संशोधित सूची जारी कर दी गई। नई सूची में स्पष्ट रूप से कहा गया कि:”आदेश दिनांक 18 सितंबर 2025 के सरल क्रमांक 18 में उप अभियंता का नाम टंकण त्रुटिवश सम्मिलित हो गया है, जिसे विलोपित किया जाता है।विभाग की यह सफाई देने के बावजूद मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग इस त्रुटि को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार
जैसे ही यह खबर सामने आई, ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। यूजर्स ने पूछा कि जब विभाग के पास कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड होता है, तो मृत कर्मचारी का नाम सूची में कैसे आ गया? कई लोगों ने इसे “नक़ल-पेस्ट प्रशासन” की उपज बताते हुए विभागीय लापरवाही की निंदा की।
क्या कहते हैं जानकार?
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि कई विभागों में डेटा अपडेटिंग सिस्टम कमजोर है। अधिकारियों को कर्मचारियों के निधन की सूचना समय पर नहीं मिलती या फिर रिकॉर्ड में सुधार नहीं किया जाता, जिसकी वजह से ऐसी गंभीर गलतियाँ होती हैं।
मृतक योगानंद सोम का तबादला छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक सिस्टम में एक बड़ी चूक के तौर पर दर्ज हो गया है। हालांकि विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नया आदेश जारी कर गलती सुधारी, लेकिन यह मामला साफ करता है कि विभागों को अपने डेटा मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करने की जरूरत है।
इस लापरवाही से न केवल विभाग की छवि खराब हुई है, बल्कि यह भी उजागर हुआ है कि मानवीय संवेदनाओं के प्रति कितनी असंवेदनशीलता बरती जा रही है।
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