Trump Bagram Airbase: अमेरिका के राष्ट्रपति और 2024 के संभावित रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि बगराम एयरबेस का नियंत्रण अमेरिका को वापस नहीं दिया गया, तो इसके “गंभीर परिणाम” होंगे। यह बयान उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दिया।

ट्रंप ने लिखा, “अगर अफगानिस्तान बगराम एयरबेस उन लोगों को नहीं देता जिन्होंने इसे बनाया – यानी अमेरिका – तो बुरी चीजें होंगी।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन है और अमेरिका का सीधा सैन्य हस्तक्षेप फिलहाल सीमित है।

क्या है बगराम एयरबेस का महत्व?
बगराम एयरबेस अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य रणनीति का दशकों तक अहम केंद्र रहा। यह एयरबेस अमेरिका ने 2001 के बाद बनाए गए अपने अभियानों के लिए तैयार किया था। यहां से आतंक विरोधी गतिविधियों, ड्रोन हमलों और सैनिकों की तैनाती की जाती थी। 2021 में जो बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद यह एयरबेस तालिबान के नियंत्रण में चला गया। ट्रंप ने पहले भी बाइडेन की वापसी नीति को “पूर्ण आपदा” करार दिया है और कहा है कि अमेरिका को बगराम जैसी रणनीतिक जगह कभी नहीं छोड़नी चाहिए थी।
चीन से भी जुड़ा है मामला
ट्रंप ने इस बार बगराम एयरबेस को लेकर जो सबसे बड़ी बात कही, वह है इसका चीन से रणनीतिक निकटता।उन्होंने कहा, “यह बेस चीन के परमाणु हथियार निर्माण स्थल से केवल एक घंटे की दूरी पर है।” ट्रंप के अनुसार, अमेरिका को बगराम की आवश्यकता है न केवल अफगानिस्तान की स्थिरता बल्कि चीन पर निगरानी रखने के लिए भी। यह बयान अमेरिकी सामरिक नीति में संभावित बदलाव की ओर संकेत करता है, खासकर अगर ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं।
अफगानिस्तान का जवाब
अफगान विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जाकिर जलाल ने अमेरिका की संभावित सैन्य वापसी पर आपत्ति जताई है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “अफगानिस्तान और अमेरिका को संवाद बनाए रखना चाहिए, लेकिन हमें देश में किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति की आवश्यकता नहीं है।”तालिबान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह विदेशी सेनाओं की वापसी को अफगान संप्रभुता के खिलाफ मानता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आगे की राह
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाकात के दौरान भी ट्रंप ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने साफ कहा कि बगराम वापस पाने के लिए राजनयिक और सामरिक दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।यह बयान न केवल अफगान-अमेरिकी संबंधों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि चीन और अमेरिका के बीच भू-राजनीतिक तनाव को भी और भड़का सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान स्पष्ट रूप से 2024 चुनावों से पहले उनकी आक्रामक विदेश नीति की झलक देता है।बगराम एयरबेस को लेकर अमेरिका और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ सकता है और यदि ट्रंप सत्ता में लौटते हैं, तो यह मुद्दा वैश्विक रणनीति का केंद्र बन सकता है।










