Uddhav Thackeray : शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने वाले छह सांसदों को आड़े हाथों लिया है। मराठवाड़ा के अपने दौरे के दौरान उद्धव ने इन सांसदों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने की पुरजोर मांग की है। उद्धव ने कहा कि यदि देश में कानून का राज है और संविधान की मर्यादा बची है, तो इन दलबदलू सांसदों को तुरंत अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों का निष्कासन किसी विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि केवल अपने निजी स्वार्थ और राजनीतिक फायदे के लिए हुआ है।

राम मंदिर को ‘दुकान’ बताने पर भाजपा पर बरसे
धाराशिव और परभणी की जनसभाओं में उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखे राजनीतिक हमले किए। राम मंदिर में चढ़ावे और भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र करते हुए उन्होंने भाजपा को ‘बाबर जनता पार्टी’ जैसा विवादित नाम दिया। उद्धव ने कहा कि जिस प्रकार बाबर ने राम मंदिर को तोड़ा था, अब ये लोग मंदिर को लूटकर और उसे ‘दुकान’ बनाकर आस्था का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मंदिर के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा और आस्था को लूटने वाली इस पार्टी में भला क्या अंतर है? उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा ने हिंदुत्व की विचारधारा के साथ भी गहरा विश्वासघात किया है।

‘ऑपरेशन देवेंद्र’ और महाराष्ट्र की अस्मिता का सवाल
परभणी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने इस राजनीतिक उलटफेर को ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना को तोड़ना महज एक बगावत नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के स्वाभिमान को खत्म करने का एक बड़ा षड्यंत्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व महाराष्ट्र की संपत्तियों और उद्योगों को गुजरात ले जाना चाहता है। उद्धव ने यह भी कहा कि भाजपा अपने ही नेताओं, जैसे नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के ‘पर काटने’ में लगी है ताकि वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बाहर रहें। उन्होंने तंज कसा कि देवेंद्र फडणवीस दिल्ली जाने का सपना देख रहे हैं, जिसके लिए महाराष्ट्र की शिवसेना को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
22 जून का बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
गौरतलब है कि 22 जून को उद्धव ठाकरे की शिवसेना को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उनके लोकसभा के नौ में से छह सांसद पाला बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए। इस दलबदल के बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई है, जिससे राज्य की राजनीति में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। उद्धव अब इन सांसदों के संसदीय क्षेत्रों में जनसभाएं कर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। वे लगातार जनता के बीच जाकर यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि किस प्रकार मराठी अस्मिता और छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वाभिमान को कुचलने की साजिश रची जा रही है। यह राजनीतिक संघर्ष अब महाराष्ट्र के अस्तित्व और विचारधारा की लड़ाई में बदल चुका है।










