TS Singhdev Statement: छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं और कूटनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की विदेश यात्राएं और उनके द्वारा दिए गए बयानों से देश की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। सिंहदेव के इस बयान से सियासी हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

“आपने किसी देश के प्रधानमंत्री को नहीं देखा होगा…”
अपने बयान में टी.एस. सिंहदेव ने कहा “आपने किसी देश के प्रधानमंत्री को नहीं देखा होगा कि वह बाहर जाकर चुनाव प्रचार करते हैं। इतनी ज्यादा दोस्ती और अपनापन दोनों देश (भारत-अमेरिका) के बीच है, लेकिन इसका कोई ठोस लाभ नजर नहीं आता। प्रधानमंत्री जी कई बातें कहते हैं जो बाद में सही साबित नहीं होतीं। तो फिर सफलता कहां दिख रही है?”उन्होंने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को बनाने की कोशिश में भारत की राजनयिक साख को दांव पर लगा रहे हैं।

देश की छवि हो रही धूमिल?
टी.एस. सिंहदेव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विदेशों में जाकर व्यक्तिगत प्रचार करना, और कई बार मंचों से विवादास्पद टिप्पणियां करना, भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करता है।”आप अपनी छवि के साथ देश की छवि खराब कर रहे हैं…”यह कहते हुए सिंहदेव ने यह सवाल खड़ा किया कि क्या किसी अन्य लोकतांत्रिक देश का प्रधानमंत्री इस तरह सार्वजनिक मंचों पर दूसरे देशों में जाकर चुनावी रुझान पैदा करता है?
विदेश नीति या इवेंट मैनेजमेंट?
कांग्रेस नेता के इस बयान को विपक्षी दल मोदी सरकार की “इवेंट बेस्ड डिप्लोमेसी” के खिलाफ उठी एक और आवाज मान रहे हैं। सिंहदेव ने यह भी इशारा किया कि भारत की विदेश नीति अब स्थायी रणनीति नहीं, बल्कि तात्कालिक लोकप्रियता और इमेज बिल्डिंग का माध्यम बन गई है।
भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि अब तक भाजपा की ओर से सिंहदेव के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह तय है कि कांग्रेस की यह आलोचना आगामी चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। भाजपा आमतौर पर प्रधानमंत्री की विदेश नीति को भारत की वैश्विक साख बढ़ाने वाली बताती रही है।
टी.एस. सिंहदेव के इस बयान ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। एक तरफ सरकार इसे देश की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक मानती है, वहीं विपक्ष इसे व्यक्तिगत प्रचार और राष्ट्रीय छवि के नुकसान के रूप में देखता है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी विमर्श का हिस्सा बन सकता है।
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