Conversion laws in India: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में एक समारोह में हिस्सा लेते हुए आदिवासी समाज की सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना की और धर्मांतरण के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने का ऐलान किया। यह कार्यक्रम धुरवा समाज के वरिष्ठजनों की उपस्थिति में आयोजित हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने समाज के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए आभार व्यक्त किया।

आदिवासी संस्कृति को बताया प्रेरणादायक
समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा, “धुरवा समाज की यह परंपरा अत्यंत सराहनीय है कि वे किसी भी अनाज या फल का सेवन करने से पहले उसे अपने देवी-देवताओं को अर्पित करते हैं। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हमारी संस्कृति की गहराई और परंपरा का भी परिचायक है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आदिवासी समाज की जीवनशैली, प्रकृति से जुड़ी उनकी आस्था और रीति-रिवाज भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित और सम्मानित किया जाना चाहिए।
धर्मांतरण पर होगा सख्त कानून
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए कहा, “राज्य सरकार को जहां-जहां भी धर्मांतरण की शिकायतें मिल रही हैं, वहां सख्त कार्रवाई की जा रही है। लेकिन अब वक्त आ गया है कि इस पर कानूनी रूप से भी कठोर प्रावधान किए जाएं।”
उन्होंने ऐलान किया कि आगामी विधानसभा सत्र में छत्तीसगढ़ सरकार एक सख्त धर्मांतरण विरोधी विधेयक पेश करेगी, ताकि राज्य में जबरन या धोखे से किए जा रहे धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दल इस विधेयक को लेकर क्या रुख अपनाते हैं। हालांकि राज्य में आदिवासी समाज के बीच बढ़ते धर्मांतरण को लेकर पहले भी बहस छिड़ चुकी है, लेकिन यह पहली बार है जब सरकार ने इसे लेकर कानूनी कार्रवाई की दिशा में स्पष्ट संकेत दिए हैं।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह बयान एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आदिवासी परंपराओं को सम्मान देते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सख्ती की बात कर राज्य की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने की प्रतिबद्धता जाहिर की है।











