Israel Hamas War: इज़रायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष ने अब ‘माइंड गेम’ का रूप ले लिया है। हमास की सशस्त्र शाखा अल-क़स्साम ब्रिगेड ने हाल ही में एक बड़ा मनोवैज्ञानिक हमला करते हुए 7 अक्टूबर को अगवा किए गए 47 इज़रायली बंधकों की तस्वीरें सार्वजनिक की हैं। इन तस्वीरों को ‘विदाई तस्वीरें’ करार दिया गया है, जो यह संकेत देती हैं कि इन बंधकों का अंत निकट है।

नेतन्याहू पर दबाव बनाने की रणनीति
इन तस्वीरों के ज़रिए हमास ने सीधे इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर दबाव बनाने की कोशिश की है। अल-क़स्साम ब्रिगेड के बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि “इन बंधकों की संभावित मौत के लिए जिम्मेदार नेतन्याहू की जिद और गाजा में सैन्य कार्रवाई है।”

इस बयान के साथ ही इज़रायल में राजनीतिक उबाल आ गया है। बंधकों के परिवारों ने युद्धविराम और बंधकों की रिहाई की मांग करते हुए सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। राजधानी तेल अवीव समेत कई शहरों में जनता का गुस्सा भड़क गया है। नागरिकों का कहना है कि नेतन्याहू सरकार की नीतियां नागरिकों की जान को खतरे में डाल रही हैं।
‘रॉन अराद’ नाम के पीछे की चेतावनी
तस्वीरों के नीचे लिखा गया नाम ‘रॉन अराद’ भी एक खास संदेश लिए हुए है। अराद, इज़रायली वायुसेना के कैप्टन थे जो 1986 में लेबनान में लापता हो गए थे। उन्हें पकड़ने के बाद अमल मूवमेंट ने हिज़्बुल्लाह को सौंप दिया था। तमाम कोशिशों के बावजूद, इज़रायल उन्हें कभी वापस नहीं ला पाया।
हमास का यह संदर्भ साफ तौर पर इज़रायली इतिहास की सबसे बड़ी कूटनीतिक असफलताओं में से एक की ओर इशारा है यह जताने के लिए कि अगर नेतन्याहू नहीं झुके, तो 47 बंधकों का हाल भी रॉन अराद जैसा ही हो सकता है।
गाजा में सैन्य अभियान तेज, बंधकों की जान पर खतरा
इज़रायली सेना ने हाल ही में गाजा में ‘अंतिम सैन्य अभियान’ की शुरुआत की है। इसके चलते गाज़ा से लाखों लोग पलायन कर चुके हैं और मृतकों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में बंधकों की जान को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव
हमास की ‘विदाई तस्वीरें’ सामने आने के बाद, नेतन्याहू सरकार पर घरेलू ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ गया है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के कई नेताओं ने बंधकों की सुरक्षित रिहाई के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं।
इज़रायल में विपक्षी दलों ने भी सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं और बंधकों को सुरक्षित लाने की मांग की है। तेल अवीव में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बंधकों के परिजन भी शामिल हैं।
हमास द्वारा जारी की गई यह ‘विदाई तस्वीरें’ सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव का हथियार हैं। इससे इज़रायल की सरकार की नीति, रणनीति और निर्णय लेने की क्षमता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग चुका है। अब यह देखना होगा कि नेतन्याहू इस चुनौतीपूर्ण मोड़ पर रणनीति में बदलाव करते हैं या टकराव की राह पर अडिग रहते हैं।











