Gen-Z Protests in Peru: भ्रष्टाचार, पेंशन कानून और बेरोजगारी के खिलाफ फूटा गुस्सा, पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प

Gen-Z Protests in Peru: लैटिन अमेरिका का पेरू इन दिनों Gen-Z के जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन की आग में जल रहा है। राजधानी लीमा की सड़कों पर सैकड़ों युवा सरकार विरोधी प्रदर्शन करते हुए उतर आए हैं। इन प्रदर्शनों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, धक्का-मुक्की, पथराव और आंसू गैस की घटनाएं सामने आई हैं।

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क्यों फूटा जनाक्रोश?

पेरू में बढ़ते अपराध, गहराता भ्रष्टाचार, और हाल ही में लागू किया गया पेंशन सुधार कानून इन विरोध प्रदर्शनों की प्रमुख वजह हैं। खासकर Gen-Z—यानी 18 से 25 वर्ष के बीच की युवा पीढ़ी— सरकार की नीतियों से बेहद नाराज़ है।

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हाल में पारित एक कठोर कानून के तहत युवाओं के लिए प्राइवेट पेंशन फंड में शामिल होना अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि देश में बेरोजगारी दर भी ऊंचाई पर है। इससे नाराज युवाओं ने सरकार से रोजगार और पारदर्शी नीतियों की मांग करते हुए मोर्चा खोल दिया।

संसद की ओर कूच, पुलिस की सख्ती

शनिवार को करीब 500 प्रदर्शनकारी राजधानी लीमा में इकट्ठा हुए और नारेबाजी करते हुए संसद की ओर कूच करने लगे। सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस बल की भारी तैनाती कर दी। जैसे ही प्रदर्शनकारी कांग्रेस भवन के पास पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद हिंसा भड़क उठी।

प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और लाठियों से हमला किया, वहीं पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। इस झड़प में कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए। घटनास्थल पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।

“लोकतंत्र नहीं, डर का माहौल है”

प्रदर्शन में शामिल एक 54 वर्षीय प्रदर्शनकारी ने कहा, “आज पेरू में लोकतंत्र नहीं बचा। हम डर के साए में जी रहे हैं। सरकार की नीतियां तबाही ला रही हैं।” यह बयान दर्शाता है कि विरोध केवल युवा वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी आयु वर्ग के नागरिकों में गहरी असंतुष्टि है।

गिरती लोकप्रियता और अस्थिर राजनीतिक माहौल

पेरू की राष्ट्रपति दीना बोलुआर्टे का कार्यकाल अगले वर्ष समाप्त हो रहा है, लेकिन उनकी लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार हो रही जबरन वसूली, अपराधों में बढ़ोतरी, और कांग्रेस की रूढ़िवादी नीतियां सरकार के खिलाफ जनाक्रोश को बढ़ावा दे रही हैं।

Gen-Z का यह विरोध आंदोलन सिर्फ एक पेंशन कानून के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह भ्रष्ट व्यवस्था, रोजगार की कमी, और लोकतंत्र के गिरते स्तर के खिलाफ जनजागृति का संकेत है। अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं खोजा, तो यह आंदोलन राष्ट्रीय संकट का रूप ले सकता है।

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