Jaishankar Rubio Meeting: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 80वीं बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच न्यूयॉर्क में महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह इस वर्ष दोनों नेताओं की तीसरी आमने-सामने मुलाकात थी। इससे पहले वे जनवरी और जुलाई में क्वाड सम्मेलन के दौरान मिले थे।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब H-1B वीजा शुल्क में भारी बढ़ोतरी और भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा शुल्क को बढ़ाकर $1,00,000 कर दिया है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों और टेक कंपनियों में चिंता गहरा गई है।

मुलाकात में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने सेक्रेटरी रुबियो के साथ द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने लिखा, “न्यूयॉर्क में सेक्रेटरी रुबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी। हम संपर्क में बने रहेंगे।”
सूत्रों के अनुसार, H-1B वीजा, उच्च आयात शुल्क, द्विपक्षीय निवेश और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी जैसे विषय चर्चा में रहे। यह बैठक दोनों देशों के बीच रिश्तों को स्थिर करने और आगे की दिशा तय करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
व्यापार और निवेश पर क्या रुख है?
अमेरिका द्वारा अगस्त से भारतीय उत्पादों पर 50% तक आयात शुल्क लगाए जाने के बाद व्यापारिक संबंधों में खटास आई थी। हालांकि दोनों देशों की ओर से अब रिश्ते सुधारने की कोशिशें हो रही हैं। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) को लेकर भी चर्चा चल रही है, ताकि निवेश को सुरक्षित और दीर्घकालिक बनाया जा सके।
रूबियो और ट्रंप के बयान
सेक्रेटरी मार्को रुबियो पहले भी कह चुके हैं कि भारत अमेरिका का एक ‘अहम रणनीतिक साझेदार’ है। उन्होंने यह भी माना कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का केंद्र है, और इसी कारण अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी कमांड का नाम भी बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ कर दिया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता करना मुश्किल नहीं होगा। इसके अलावा, उन्होंने सर्जियो गोर को भारत के लिए नया अमेरिकी राजदूत नामित किया है, जो भारत-अमेरिका संबंधों को और गति दे सकता है।
मुलाकात के मायने
जयशंकर और रुबियो की यह बैठक न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, बल्कि H-1B और व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर समाधान खोजने की कोशिश भी है। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, खासकर तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में, आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में भी अहम भूमिका निभा सकता है।











