Italy Protests Giorgia Meloni: इटली में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ हाल ही में व्यापक प्रदर्शन हुए हैं, जो हिंसक रूप धारण कर गए हैं। ये प्रदर्शन फिलिस्तीन को लेकर बढ़ती वैश्विक मान्यता के बीच शुरू हुए हैं। पश्चिमी देशों में फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिलने के बाद इटली में यह आंदोलन भड़क उठा है, क्योंकि इटली ने फिलिस्तीन को अभी तक मान्यता नहीं दी है। इस फैसले को लेकर देश में गुस्सा व्याप्त है और प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर हिंसक झड़पें की हैं।

फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले देशों की बढ़ती संख्या
पिछले कुछ दिनों में कई प्रमुख देशों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी है। फ्रांस ने मंगलवार को औपचारिक रूप से फिलिस्तीन को मान्यता दी, जो संयुक्त राष्ट्र की मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया की बैठक के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की। इससे पहले ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पुर्तगाल समेत कुल 152 देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है। भारत ने भी 1988 में फिलिस्तीन को मान्यता दे रखी है। हालांकि, इजरायल, अमेरिका, जापान और इटली जैसे देश फिलिस्तीन को मान्यता नहीं देते।

इटली में विरोध प्रदर्शन का कारण
इटली ने फिलिस्तीन को मान्यता न देने का निर्णय कई फिलिस्तीनी समर्थक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गहरा आहत कर दिया है। इसका नतीजा यह हुआ कि देश के कई बड़े शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने गाजा पट्टी में जारी हिंसा के खिलाफ फौरन युद्धविराम की मांग की।
हिंसक प्रदर्शन और पुलिस से झड़प
मिलान के सेंट्रल ट्रेन स्टेशन पर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहनकर धावा बोला। उन्होंने पुलिस पर स्मोक बम, बोतलें और पत्थर फेंके। प्रदर्शन के दौरान स्टेशन में आगजनी और तोड़फोड़ भी हुई। कई सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया। इस हिंसा में 60 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए और 10 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हिंसक प्रदर्शन के कारण ट्रेन सेवा ठप्प हो गई और कई बंदरगाहों को भी बंद करना पड़ा।
रोम, मिलान और नेपल्स जैसे बड़े शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों और रेलवे स्टेशनों पर जाम लगाया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का रुख
जॉर्जिया मेलोनी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि ये प्रदर्शन उनके ऊपर दबाव बनाने के लिए orchestrated हैं। मेलोनी ने साफ किया है कि फिलहाल इटली फिलिस्तीन को मान्यता देने का कोई इरादा नहीं रखता। उनका मानना है कि इस मसले पर सावधानी और रणनीति से ही आगे बढ़ना चाहिए।
फिलिस्तीन को मान्यता को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तेज बदलाव हो रहे हैं, लेकिन इटली की इस नीति के चलते देश के अंदर तनाव और हिंसा भी बढ़ रही है। फिलिस्तीन समर्थक समूह फिलिस्तीन के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं, वहीं सरकार कठोर कार्रवाई कर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
यह मामला इटली की आंतरिक राजनीति और वैश्विक कूटनीति दोनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, खासकर मध्य पूर्व की नाजुक स्थिति के बीच। आने वाले दिनों में इस विवाद पर और राजनीतिक हलचल की संभावना बनी हुई है।
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