UNGA 2025: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उठाकर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि कश्मीर का मसला बातचीत और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के अनुसार हल होना चाहिए। एर्दोगन ने पाकिस्तान के साथ शांति और बातचीत की वकालत करते हुए दक्षिण एशिया में स्थिरता की बात कही।

एर्दोगन ने कहा, “कश्मीर की समस्या का समाधान संवाद से होना चाहिए। भारत और पाकिस्तान को मिलकर इस मसले का हल निकालना चाहिए, ताकि क्षेत्र में शांति कायम रह सके। अप्रैल में हुए सीजफायर का हम स्वागत करते हैं।”

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब तुर्किए ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष लिया है। इससे पहले भी एर्दोगन अंतरराष्ट्रीय मंचों से इस तरह के बयान दे चुके हैं, जिन्हें भारत बार-बार खारिज करता आया है।
आतंकवाद पर पाकिस्तान को बचाने की कोशिश
एर्दोगन ने आतंकवाद पर बात करते हुए पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की कोशिश की। उन्होंने इशारों में पाकिस्तान को पाक-साफ करार देते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान को मिलकर आतंकवाद से लड़ना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान की आतंकवाद पर भूमिका पर कोई आलोचना नहीं की, जबकि भारत लगातार पाकिस्तान पर आतंकियों को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किए की भूमिका
हाल ही में भारत द्वारा किए गए “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान यह सामने आया था कि तुर्किए ने पाकिस्तान को सैन्य सहयोग दिया था। इस ऑपरेशन में भारत ने आतंकियों के कई ठिकानों को निशाना बनाया था। ऐसे में तुर्किए का पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा होना और अब कश्मीर मुद्दे को उठाना, उसकी नीयत पर सवाल खड़े करता है।
भारत की प्रतिक्रिया: “कश्मीर हमारा आंतरिक मामला”
भारत ने हमेशा की तरह तुर्किए के इन बयानों को खारिज किया है। भारत का स्पष्ट कहना है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है। किसी भी बाहरी देश को इस मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। भारत ने पहले भी तुर्किए के बयानों को “गैर-जरूरी” और “दुर्भावनापूर्ण” करार दिया है।
गाजा पर भी बोले एर्दोगन
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दोगन ने गाजा में इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों को “नरसंहार” बताया। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की जान ली जा रही है और यह मानवता के खिलाफ है। एर्दोगन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब गाजा में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें वहां की स्थिति पर टिकी हैं।
तुर्किए की कश्मीर पर टिप्पणी कोई नई बात नहीं है, लेकिन भारत इस तरह के बयानों को गंभीरता से नहीं लेता। भारत का रुख साफ है — कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इस पर किसी तीसरे देश की टिप्पणी अस्वीकार्य है। तुर्किए का पाकिस्तान के प्रति झुकाव और कश्मीर पर उसकी बयानबाज़ी एक बार फिर उजागर हो गई है।
Read More : Navratri 2025 Chandraghanta: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व और विधि











