Trump UNGA 2025: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) 2025 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान एक बार फिर विवादास्पद बयान देकर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने भारत और चीन पर यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंड करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि रूस से तेल खरीदकर ये देश यूक्रेन युद्ध के लिए आर्थिक समर्थन दे रहे हैं।

“तेल खरीदकर युद्ध को दे रहे ईंधन” – ट्रंप
अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा,”भारत और चीन जैसे देश रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं। ये पैसा कहां जा रहा है? यही पैसा यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है।”उन्होंने आगे कहा कि इन देशों की नीतियां अप्रत्यक्ष रूप से रूस को समर्थन दे रही हैं और इससे युद्ध लंबा खिंच रहा है।

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब वैश्विक मंचों पर भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वह युद्ध नहीं, संवाद का पक्षधर है। भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कई बार शांति की अपील की है और दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात दोहराई है।
गड़बड़ टेलीप्रॉम्प्टर और बयानबाज़ी का सिलसिला
ट्रंप के भाषण की शुरुआत ही तकनीकी गड़बड़ी से हुई, जब उनका टेलीप्रॉम्प्टर काम नहीं कर रहा था। इसके बाद भी ट्रंप ने अपना भाषण जारी रखा और एक बार फिर अपने “8 महीने में 7 युद्ध रोकने” की उपलब्धि गिनाई। हालांकि, उन्होंने इस दावे को लेकर कोई ठोस आंकड़े या तथ्य नहीं प्रस्तुत किए।
गाजा-इजरायल संघर्ष पर भी बोले ट्रंप
यूक्रेन युद्ध के अलावा ट्रंप ने गाजा-इजरायल संघर्ष पर भी अपनी राय दी। उन्होंने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन मानवीय संकट पर चुप्पी साध ली। गाजा में हो रही निर्दोष नागरिकों की मौत पर उन्होंने कोई सीधी टिप्पणी नहीं की, जिससे उनके बयान को एकतरफा माना जा रहा है।
भारत की स्थिति और प्रतिक्रिया
भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करता। रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पहले ही कह चुका है कि वह रियायती दरों पर अपने नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाता है।
भारत यूक्रेन युद्ध में किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करता, बल्कि शांति और कूटनीतिक समाधान की हिमायत करता है। ऐसे में ट्रंप का यह आरोप भारत की घोषित विदेश नीति के विपरीत है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर उनकी ‘अवसरवादी कूटनीति’ को उजागर किया है। भारत और चीन जैसे देशों पर यूक्रेन युद्ध को फंड करने का आरोप, न केवल तथ्यहीन प्रतीत होता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर बेवजह की तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में भारत की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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