Ladakh violence: लद्दाख में राज्य के दर्जे समेत कई मांगों को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप धारण कर चुका है। सोमवार सुबह से शुरू हुए इस प्रदर्शन के दौरान अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 70 लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शन का मुख्य केंद्र लेह शहर रहा, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। इस गंभीर स्थिति के बीच, लंबे समय से लद्दाख के लोगों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शांति का संदेश देते हुए हिंसा को आंदोलन की सफलता में बाधा बताया है। प्रदर्शन के कारण और हिंसक रूप लद्दाख के लोग राज्य का दर्जा देने, स्थानीय अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक बदलावों की मांग कर रहे हैं। कई महीनों से चल रहे बातचीत के बावजूद केंद्र सरकार ने मांगों को मानने से इंकार कर दिया। इस पर लोगों का गुस्सा फूटा और लेह तथा लद्दाख के अन्य इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों पर पथराव किया और कुछ पुलिस वैनों में आग भी लगाई गई। भाजपा कार्यालय में भी आग लगने की खबर आई है। प्रशासन की प्रतिक्रिया और कर्फ्यू हिंसक प्रदर्शन को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया है और पांच या उससे अधिक लोगों के एक साथ जमा होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी तरह का जुलूस, रैली या मार्च आयोजित नहीं किया जाएगा। इस कड़े कदम का मकसद स्थिति को नियंत्रित कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सोनम वांगचुक का शांति संदेश लद्दाख के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे जलवायु कार्यकर्ता और युवा नेता सोनम वांगचुक ने हिंसा को गलत बताया है। उन्होंने कहा, “हिंसा आंदोलन के उद्देश्य को विफल कर देगी। हमें शांति और संवाद के माध्यम से अपने मुद्दे उठाने चाहिए।” सोनम का यह संदेश इस संकट के बीच लोगों के लिए उम्मीद और समझदारी का प्रतीक है। प्रदर्शन का नेतृत्व और मांगें लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) की युवा शाखा ने इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, स्थानीय संसाधनों का संरक्षण, और प्रशासनिक स्वायत्तता बढ़ाना हैं। यह मांगें लंबे समय से क्षेत्रवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हैं। लद्दाख में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन ने क्षेत्र की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को अत्यंत तनावपूर्ण बना दिया है। 4 मौतें और 70 से अधिक घायल इस घटना की गंभीरता को दर्शाती हैं। प्रशासन की कड़ी कार्रवाई और लगाए गए कर्फ्यू के बीच, सोनम वांगचुक का शांति का संदेश इस समय बेहद महत्वपूर्ण है। हिंसा से बचकर संवाद और शांतिपूर्ण प्रदर्शन ही स्थायी समाधान का मार्ग है। Read More: Rajya Sabha Election : राज्यसभा की 5 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान: पंजाब और जम्मू-कश्मीर में 24 अक्टूबर को होगा मतदान
















