Abhishek Banerjee: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र ने बंगाल का 2 लाख करोड़ रुपये का फंड रोक रखा है, जो राज्य के अधिकार का धन है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह पैसा किस नियम के तहत रोका गया है और कब छोड़ा जाएगा?

अभिषेक बनर्जी ने यह बयान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया, जिसमें उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, “अगर गृह मंत्री कहते हैं कि TMC झूठ बोल रही है तो मैं दस्तावेज लेकर आने को तैयार हूं। आप बस समय और स्थान बताइए।”

केंद्र पर पक्षपात का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक भेदभाव के तहत बंगाल का फंड रोक रही है। उन्होंने कहा, “आप सोनार बंगाल बनाने की बात करते हैं, लेकिन पहले ये बताइए कि जो बंगाल का हक है, वो कब मिलेगा? क्या सोनार बिहार बन गया जहां दो दिन पहले सड़क धंस गई? क्या सोनार गुजरात या महाराष्ट्र बन गया जहां रोज ब्रिज टूट रहे हैं?”
उनका आरोप था कि केंद्र सरकार बंगाल से टैक्स और संसाधनों के माध्यम से पैसा लेकर उसे उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे बीजेपी शासित राज्यों में लगा रही है, जबकि बंगाल को उसके हिस्से का पैसा नहीं दिया जा रहा।
“बंगाल ने दिखाया वील पावर”
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब दो दिन पहले बंगाल में भारी बारिश हुई थी, तो मीडिया ने दिखाया कि बंगाल डूब गया है। लेकिन केवल 48 घंटे में स्थिति को सामान्य करना बंगाल सरकार की कार्यशैली और इच्छाशक्ति को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “अगर सरकार की मानसिकता काम करने की हो, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। यही हमने करके दिखाया है।”
केंद्र बनाम राज्य: फिर गरमाई सियासत
TMC लगातार केंद्र सरकार पर यह आरोप लगाती रही है कि वह राजनीतिक कारणों से मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) समेत कई केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली राशि को राज्य को नहीं दे रही। अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार के पास कोई वैध कारण है, तो सार्वजनिक रूप से बताएं कि बंगाल का फंड क्यों रोका गया है। उन्होंने चुनौती दी कि अगर TMC झूठ बोल रही है तो वह खुद दस्तावेजों के साथ आमने-सामने बहस करने को तैयार हैं।
अभिषेक बनर्जी के बयान से स्पष्ट है कि केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच वित्तीय और राजनीतिक खींचतान लगातार गहराती जा रही है। आने वाले चुनावों के मद्देनज़र यह मुद्दा और भी अहम हो सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि केंद्र सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है, और क्या वाकई कोई समाधान निकलता है या यह विवाद और बढ़ता है।











