Israel UN Politics: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान हुए बहिष्कार ने वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। इस बहिष्कार पर ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने जोरदार तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नेतन्याहू की एक फोटो साझा करते हुए कहा कि “जायोनी शासन दुनिया में सबसे अधिक तिरस्कार और अलग-थलग महसूस करने वाला शासन है।”

UN महासभा में नेतन्याहू का बहिष्कार क्यों?
शुक्रवार को जब नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना भाषण दे रहे थे, तब कई देशों ने उनका बहिष्कार किया। अरब और मुस्लिम देशों के साथ-साथ अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के कई प्रतिनिधि नेतन्याहू के भाषण का विरोध करते हुए हॉल से बाहर चले गए। इस बायकॉट ने इजरायल की अंतरराष्ट्रीय छवि पर गहरा प्रभाव डाला है।

हालांकि, अमेरिका ने इजरायल के समर्थन में अपनी सीटें नहीं छोड़ीं और नेतन्याहू का समर्थन जारी रखा। यह घटना ऐसे वक्त पर हुई जब इजरायल पहले से ही वैश्विक स्तर पर आलोचना और अलगाव का सामना कर रहा है।
नेतन्याहू ने UN में क्या कहा?
नेतन्याहू ने भाषण में गाजा में सैन्य कार्रवाई को लेकर स्पष्ट कहा कि “इजरायल जल्द से जल्द गाजा में अपना काम पूरा करेगा।” उन्होंने यह भी बताया कि गाजा पट्टी के चारों ओर लाउडस्पीकर लगाए गए हैं ताकि उनका भाषण फिलिस्तीनी नागरिकों तक भी पहुंच सके। इस बयान ने विवादों को और हवा दी और उनके खिलाफ विरोधी समूहों की आवाज़ें तेज़ हो गईं।
यूरोपीय देशों का भी विरोध
अक्सर अमेरिका के करीबी माने जाने वाले यूरोपीय देशों ने भी इस मौके पर नेतन्याहू के भाषण का विरोध किया। कई यूरोपीय प्रतिनिधि भी हॉल छोड़कर बाहर चले गए, जिससे यह साफ हो गया कि इजरायल को वैश्विक मंच पर कितना अलग-थलग रखा गया है। अरब और मुस्लिम देशों के अलावा अफ्रीकी देशों ने भी इस बायकॉट में हिस्सा लिया।
खामेनेई का तंज और वैश्विक राजनीति
आयतुल्ला अली खामेनेई ने इस मौके को भुनाते हुए नेतन्याहू और इजरायल के खिलाफ तीखा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जायोनी शासन” को पूरी दुनिया में तिरस्कार का सामना करना पड़ रहा है और वह अब सबसे अधिक अलग-थलग शासन बन चुका है। इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान इजरायल के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
UN महासभा में नेतन्याहू का भाषण और उसका बहिष्कार इजरायल के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ है। यह घटना दिखाती है कि इजरायल वैश्विक स्तर पर किस हद तक अलग-थलग होता जा रहा है। अमेरिका के समर्थन के बावजूद, कई देशों ने इस बार अपने विरोध को मुखर कर दिया है। आयतुल्ला खामेनेई के तंज ने इस राजनीतिक परिदृश्य को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक हलचल की संभावना है।
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