Peru Gen-Z Protest: नेपाल के बाद अब पेरू में भी Gen-Z का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। राजधानी लीमा में 27 सितंबर को हजारों युवा राष्ट्रपति दीना बोलुआर्ते की सरकार और हाल ही में लागू किए गए पेंशन सुधारों के खिलाफ प्रदर्शन करते नजर आए। यह आंदोलन सिर्फ पेंशन सिस्टम के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा और सरकार की जवाबदेही की कमी को लेकर युवाओं की नाराजगी का प्रतीक बन गया है।

क्या है पेंशन सुधार विवाद?
पेरू सरकार ने 20 सितंबर को एक नया नियम लागू किया, जिसके तहत अब देश में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का हर नागरिक अनिवार्य रूप से किसी न किसी पेंशन प्रदाता से जुड़ने के लिए बाध्य होगा। इससे पहले यह स्वैच्छिक था। अब यह कानून बन चुका है, जिससे युवाओं में नाराजगी बढ़ गई है।

इन पेंशन प्रदाताओं में निजी और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं, जो लोगों से हर महीने एक तय राशि जमा कराती हैं। यह पैसा रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में वापस मिलता है। लेकिन युवाओं का कहना है कि—
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बेरोजगारी के दौर में पेंशन में पैसा कैसे जमा करें?
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पेंशन कंपनियों में पहले से भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी है।
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यह योजना लोगों की मर्जी पर आधारित होनी चाहिए, न कि मजबूरी।
भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी
पेरू की राजनीति में लंबे समय से अस्थिरता और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। 2022 में पूर्व राष्ट्रपति पेद्रो कास्तिलो को हटाए जाने के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से दर्जनों प्रदर्शनकारी मारे गए थे। उस वक्त से सरकार की साख पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब यह आंदोलन उस असंतोष का नया रूप बन चुका है।
Gen-Z का नया हीरो: ‘लूफी’
इस आंदोलन की सबसे अनोखी बात यह रही कि पेरू के युवाओं ने जापानी एनिमे ‘वन पीस’ के मुख्य किरदार ‘मंकी डी. लूफी’ को अपना रोल मॉडल बनाया है। लूफी एक ऐसा पात्र है जो अन्याय और शोषण के खिलाफ लड़ता है। युवाओं ने उसके पोस्टर और मुखौटे पहनकर प्रदर्शन किए, जिससे यह आंदोलन और भी अधिक क्रिएटिव और वैश्विक पहचान वाला बन गया।
क्यों गुस्से में हैं युवा?
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पेंशन सिस्टम को लेकर जबरदस्ती: युवाओं को लगता है कि बिना रोजगार के उन पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
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भ्रष्ट व्यवस्था में भरोसे की कमी: पेंशन कंपनियों पर भ्रष्टाचार के आरोप पहले से लगे हैं।
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सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल: लोग चाहते हैं कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा को प्राथमिकता दे, न कि जबरन योजनाएं थोपे।
कितना बड़ा है यह आंदोलन?
पेरू की राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी (INEI) के अनुसार, देश की 27% आबादी 18 से 29 साल के बीच है। यह वही आयु वर्ग है जो अब इस आंदोलन की रीढ़ बन चुका है। सोशल मीडिया के जरिए यह आंदोलन तेजी से फैल रहा है और इसका असर आने वाले राजनीतिक फैसलों पर भी पड़ सकता है।
पेरू में Gen-Z का यह आंदोलन सिर्फ पेंशन सिस्टम के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जो युवाओं की आवाज को अनसुना करती है। ‘लूफी’ जैसे काल्पनिक किरदार को प्रतीक बनाकर यह पीढ़ी बता रही है कि वह अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। यह विरोध आने वाले समय में लातिन अमेरिका ही नहीं, दुनिया भर के लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिए मिसाल बन सकता है।










