PoK Protest 2025: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर उबल पड़ा है। शाहबाज शरीफ सरकार के कथित उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के खिलाफ Awami Action Committee के आह्वान पर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल और ‘शटर डाउन-चक्का जाम’ आंदोलन की शुरुआत हो गई है। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है। हालात को संभालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने सोमवार आधी रात से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं।

क्या है PoK की जनता की मांग?
Awami Action Committee पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जनता की आवाज बन चुकी है। इस संगठन ने 38 सूत्रीय मांग पत्र जारी किया है, जिसमें प्रमुख रूप से संरचनात्मक सुधार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग की गई है। एक और बड़ी मांग है — पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए PoK विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को रद्द किया जाए। स्थानीय लोग मानते हैं कि बाहरी हस्तक्षेप की वजह से उनकी आवाज दब रही है।

अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और सरकार की उदासीनता
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पीने के पानी और आधारभूत ढांचे को लेकर पूरी तरह से विफल रही है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी ने सरकारी कामकाज को पंगु बना दिया है। सरकार से बार-बार शिकायतों और मांगों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रशासन की चेतावनी और जनता का जवाब
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हड़ताल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन इसके बावजूद हड़ताल को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। स्थानीय वकीलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है। एक वरिष्ठ वकील ने कहा,“हड़ताल जनता का लोकतांत्रिक अधिकार है, सरकार को उनकी मांगें सुननी चाहिए, न कि उन्हें दबाना चाहिए।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि में नया संकेत
यह आंदोलन ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में मोरक्को दौरे के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था,“हमें PoK पर हमला करने की जरूरत नहीं, एक दिन खुद PoK कहेगा कि वह भारत का हिस्सा है।”अब PoK की सड़कों पर जो आवाजें उठ रही हैं, वो कहीं ना कहीं इसी बयान की प्रतिध्वनि बन रही हैं। जनता खुद पाकिस्तान सरकार के खिलाफ खड़ी हो रही है और अपने अधिकारों की मांग कर रही है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में Awami Action Committee के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने शाहबाज सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जनता अब चुप नहीं बैठना चाहती। PoK में लोकतांत्रिक अधिकारों, बुनियादी सुविधाओं और आत्मसम्मान के लिए उठ रही आवाजें यह साफ कर रही हैं कि यह सिर्फ एक हड़ताल नहीं, बल्कि एक जनांदोलन है — जो आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।










