Gayatri Prajapati: लखनऊ की जिला जेल में बंद उत्तर प्रदेश के पूर्व खनन मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता गायत्री प्रसाद प्रजापति पर मंगलवार शाम जानलेवा हमला हुआ। यह हमला जेल अस्पताल में हुआ, जब एक बंदी ने लोहे की पटरी से उनके सिर पर वार कर दिया। इस हमले में प्रजापति को गंभीर चोटें आईं और उनके सिर में पांच टांके लगे हैं। फिलहाल उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में भर्ती कराया गया है।

सफाई के दौरान हुआ विवाद
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना उस वक्त हुई जब जेल अस्पताल में एक बंदी सफाई कर रहा था। इसी दौरान गायत्री प्रजापति से उसका विवाद हो गया। आरोप है कि कहासुनी के दौरान प्रजापति ने बंदी को अपशब्द कहे, जिससे नाराज़ होकर उसने लोहे की पटरी से हमला कर दिया। जेल प्रशासन के अनुसार, यह पटरी अलमारी के स्लाइडिंग हिस्से की थी। हालांकि शुरू में हमले को लेकर कैंची इस्तेमाल होने की अफवाह फैली, जिसे जेल प्रशासन ने सिरे से नकार दिया।

जेल प्रशासन ने बताया मामूली झगड़ा
जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि घटना गंभीर नहीं है और आरोपी बंदी को तत्काल हिरासत में ले लिया गया है। पूछताछ की जा रही है ताकि हमले की पृष्ठभूमि और संभावित साजिशों का पता लगाया जा सके। पुलिस भी इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है कि कहीं यह हमला किसी के इशारे पर तो नहीं हुआ।
सपा ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी ने इस घटना को गंभीर मानते हुए सरकार और जेल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, “जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर हमले की खबर चिंताजनक है। लखनऊ जेल प्रशासन उन्हें समुचित इलाज मुहैया कराए और मामले की निष्पक्ष जांच हो।”
गायत्री प्रजापति का सफर: पेंटर से मंत्री तक
अमेठी के परसाना गांव निवासी गायत्री प्रजापति का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। पिता कुम्हार थे, लेकिन गायत्री ने पुताई का काम शुरू किया। उनकी किस्मत का सितारा तब चमका जब उन्हें HAL (हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड) की बिल्डिंग की पुताई का ठेका मिला। इसके बाद राजनीति में रुचि बढ़ी और उन्होंने समाजवादी पार्टी से नाता जोड़ा। अखिलेश यादव की सरकार में खनन मंत्री बने, लेकिन बाद में अवैध खनन और महिला उत्पीड़न के मामलों में जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए।
लखनऊ जेल में पूर्व मंत्री पर हुआ हमला न केवल जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि वीआईपी कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंताएं पैदा करता है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह हमला महज आपसी विवाद था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छुपी है।











