Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले (Chhattisgarh Liquor Scam) की जांच अब और गहराती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 आबकारी अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। यह मामला 2018 से 2023 के बीच, भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुए 2100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा हुआ है।

अलग-अलग तारीखों पर होगी पूछताछ
ईडी सूत्रों के मुताबिक, इन 30 अधिकारियों को अलग-अलग तारीखों में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जिन अधिकारियों को समन जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं:

1 अतिरिक्त आबकारी आयुक्त
5 उपायुक्त
14 सहायक आयुक्त
7 जिला आबकारी अधिकारी
3 अन्य अधिकारी
गौरतलब है कि इनमें से कई अधिकारी रिटायर भी हो चुके हैं, लेकिन जांच की आंच अब उन तक भी पहुंच गई है।
ईओडब्ल्यू की जांच से भी जुड़े हैं अधिकारी
छत्तीसगढ़ सरकार की जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने भी इन्हीं अधिकारियों को आरोपी बनाया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से इन अधिकारियों को गिरफ्तारी से फिलहाल राहत मिली हुई है। लेकिन ईडी की जांच अब इन अधिकारियों से पूछताछ के जरिए आर्थिक लेन-देन, नीति निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार के एंगल को गहराई से खंगालने की तैयारी में है।
2100 करोड़ बनाम 32 करोड़: दो एजेंसियों में भारी अंतर
जहां ईडी का दावा है कि शराब घोटाले की राशि 2100 करोड़ रुपये तक पहुंचती है, वहीं ईओडब्ल्यू की जांच में यह घोटाला सिर्फ 32 करोड़ रुपये का बताया गया है। इन दोनों एजेंसियों की रिपोर्ट्स में भारी अंतर को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर जांच की कार्यप्रणाली और डेटा स्रोतों में भिन्नता के कारण हो सकता है। हालांकि, ईडी का जोर अब इस बात पर है कि घोटाले में कौन-कौन से अधिकारी और कारोबारी शामिल थे, और कैसे सरकारी शराब बिक्री में बड़ी रकम की हेराफेरी की गई।
राजनीतिक गरमाहट भी तेज
इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष पहले से ही भूपेश बघेल सरकार पर घोटाले के आरोप लगाता रहा है। अब जब ईडी ने सीधे तौर पर पूर्ववर्ती शासनकाल के अधिकारियों को समन जारी किया है, तो यह मामला और भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनता जा रहा है।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी की सक्रियता से यह साफ है कि जांच अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इन अधिकारियों से पूछताछ के बाद घोटाले से जुड़े कई और रहस्य उजागर हो सकते हैं। साथ ही, यह जांच छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक नेतृत्व की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
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