Military Summit India : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति दूत बनने के लिए विश्वभर में प्रयासरत हैं, लेकिन इसी बीच भारत शांति स्थापना के क्षेत्र में एक अहम मंच तैयार कर रहा है। 14 से 16 अक्टूबर तक नई दिल्ली में ‘कॉन्कलेव ऑफ आर्मी चीफस ऑफ यूनाइटेड नेशन टॉप कंट्रिब्यूटिंग कंट्री’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के 30 देशों के सेना प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। यह बैठक वैश्विक शांति मिशनों की चुनौतियों, अनुभवों और सहयोग पर केंद्रित होगी।

भारत की शांति स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका
भारत ने 1950 से अब तक संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में 2,90,000 से अधिक सैनिक भेजे हैं। देश ने वैश्विक शांति के लिए अपने बलिदान भी दिए हैं, जिसमें 182 सैनिक शहीद हो चुके हैं। भारत पहली बार 2007 में लाइबेरिया में महिलाओं की पुलिस कंटिन्जेंट (FETs) भेजने वाला पहला देश बना, जो संघर्ष क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। वर्तमान में सभी मिशनों में महिला टीम्स शामिल हैं, जो वैश्विक शांति प्रयासों को नया आयाम देती हैं।

बैठक के मुख्य एजेंडे
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में कई विषयों पर चर्चा होगी। प्रमुख विषयों में शामिल हैं:
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संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए क्षमता निर्माण और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन।
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तकनीक के प्रभावी उपयोग से मिशनों की तत्परता और सफलता बढ़ाना।
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शांति सैनिकों की सुरक्षा और उन्हें बेहतर सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराना।
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भारत की ‘आत्मनिर्भर’ पहल और स्वदेशी तकनीक को प्रस्तुत करना।
बैठक के दौरान विदेशी प्रतिनिधि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी देंगे, जो भारत की शांति स्थापना के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बैठक का उद्देश्य और वैश्विक महत्व
नई दिल्ली में यह सम्मेलन वैश्विक शांति स्थापना में बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। बैठक का मकसद शांति मिशनों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना, देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और शांति सैनिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। साथ ही, नई तकनीकों और नवाचारों को मिशनों में शामिल कर उनकी प्रभावशीलता को बढ़ाना भी इस सम्मेलन का एक मुख्य उद्देश्य है।

भारत का मानना है कि शांति केवल सैन्य जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह मानवता और वैश्विक स्थिरता के लिए साझा कर्तव्य है। इस संदर्भ में यह बैठक संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों को मजबूत करने और शांति स्थापना के लिए वैश्विक प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगी।
लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर का संदेश
लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने इस सम्मेलन को सिर्फ सेना प्रमुखों की बैठक नहीं, बल्कि शांति, सहयोग और वैश्विक जिम्मेदारी के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत शांति स्थापना के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहा है और यह सम्मेलन इसी दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।
जहां डोनाल्ड ट्रंप विश्व के शांति दूत बनने का दावा करते नजर आ रहे हैं, वहीं भारत वैश्विक शांति स्थापना के लिए ठोस कदम उठा रहा है। नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन 30 प्रमुख देशों के सेना प्रमुखों को एक मंच पर लाकर शांति मिशनों के लिए सहयोग और रणनीतियों को मजबूत करेगा। यह न केवल भारत की वैश्विक भूमिका को बढ़ावा देगा, बल्कि पूरे विश्व के लिए शांति के प्रति साझा जिम्मेदारी का संदेश भी देगा।











