PoK Protest Firing: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार के खिलाफ जारी हिंसक प्रदर्शन तीसरे दिन भी नहीं रुके। बुधवार को सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी, जिसमें आठ लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए। अब तक इन प्रदर्शनों में कुल 10 लोगों की मौत हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को बाघ जिले के धीरकोट में चार, मुजफ्फराबाद में दो और मीरपुर में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हुई। घायल हुए करीब 100 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। PoK में जारी यह अशांति जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) की अपील पर हो रही है। प्रदर्शनकारी सरकार पर महंगाई न रोक पाने और मौलिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।

तीन दिन से जारी प्रदर्शन, राजधानी की ओर मार्च
प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर मार्च कर रहे हैं। उन्होंने सरकार के सामने 38 मांगें रखी हैं, जिनमें से प्रमुख तीन निम्नलिखित हैं:
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12 रिजर्व विधानसभा सीटों को समाप्त करने की मांग — ये सीटें भारत-प्रशासित जम्मू-कश्मीर से शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि इन सीटों को खत्म कर स्थानीय जनसंख्या को बेहतर प्रतिनिधित्व मिले।
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बिजली परियोजनाओं में स्थानीय लोगों के हितों का संरक्षण — ताकि विकास और लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंच सके।
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महंगाई के बीच आटे और बिजली के बिलों में छूट — जो स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति को राहत दे सके।
12 रिजर्व सीटों को खत्म करने की वजह
PoK में ये 12 आरक्षित विधानसभा सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए रखी गई हैं जो 1947, 1965, 1971 के युद्ध या बाद के संघर्षों के कारण भारत से PoK भागे थे। स्थानीय लोग कहते हैं कि रिजर्व सीटों के कारण उनकी जनसंख्या का उचित प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा है और कुछ परिवारों का ही राजनीतिक लाभ हो रहा है। JKJAAC का दावा है कि इस व्यवस्था के कारण स्थानीय समस्याएं अनदेखी हो रही हैं।
आंदोलन का मकसद – मौलिक अधिकारों की मांग
JKJAAC के नेता शौकत नवाज मीर ने कहा, “हमारा संघर्ष 70 साल से छुपाए गए मौलिक अधिकारों के लिए है। या तो हमें अधिकार दो या लोगों के गुस्से का सामना करो।” उन्होंने मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवारों के लिए मुआवजा और सरकारी नौकरियों की मांग भी उठाई है।
मीर ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “यह हड़ताल प्लान ए है। लोगों का धैर्य खत्म हो चुका है। हमारे पास बैकअप प्लान और प्लान डी भी है, जो बहुत खतरनाक होगा।”
स्थिति तनावपूर्ण, हालात भयावह
PoK में इस प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। प्रदर्शनकारी लगातार बढ़ते जा रहे हैं, वहीं सुरक्षा बलों की सख्ती भी बढ़ती जा रही है। सरकार की नीतियों और स्थानीय मांगों के बीच बढ़ता अंतर आगे भी क्षेत्र में तनाव बनाए रखने का कारण बन सकता है। PoK में जारी प्रदर्शन और हिंसा ने एक बार फिर इस विवादित क्षेत्र में मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं को उजागर कर दिया है। स्थानीय जनता की बढ़ती नाराजगी और सरकार की नीति के बीच का फर्क धीरे-धीरे और बड़ी असंतोष की स्थिति पैदा कर रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान सरकार इन मांगों को कैसे संभालती है और आगे की स्थिति कैसी बनती है।











